नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। यूरोप में इस साल लगातार आई चार रिकॉर्डतोड़ हीटवेव करीब 35,000 अतिरिक्त मौतों का कारण बनी हैं। यह आंकड़ा अभी अधूरा है और अगस्त के आंकड़े शामिल होने के बाद मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका है।
प्रारंभिक राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में ही 25,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। जर्मनी की पब्लिक हेल्थ एजेंसी रॉबर्ट कोच इंस्टिट्यूट (आरकेआई) के आंकड़ों के मुताबिकअप्रैल से अगस्त के बीच अनुमानित 14,000 लोगों की गर्मी से मौत हुई, जो देश में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। अकेले 22 से 28 जून के एक सप्ताह में करीब 9,600 मौतें दर्ज की गईं।
स्पेन के कार्लोस III हेल्थ इंस्टिट्यूट के मोर्टेलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार, देश में मई से अगस्त के बीच गर्मी से जुड़ी 4,947 मौतों का अनुमान है। यह देश में अब तक का सबसे घातक गर्मी का मौसम है और 2022 में दर्ज 4,520 मौतों के आंकड़े से भी अधिक है। फ्रांस में जुलाई के अंत तक करीब 7,300 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई थीं।
द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी का असर अन्य यूरोपीय देशों में भी दिखाई दिया है। बेल्जियम में 18 से 29 जून के बीच सामान्य से 1,222 अधिक मौतें दर्ज हुईं, जबकि नीदरलैंड में 22 जून से 5 जुलाई के बीच कम से कम 900 अतिरिक्त मौतें हुईं। पोलैंड में जून के अंत की हीटवेव के दौरान करीब 1,070 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। स्विट्जरलैंड में भी इसी अवधि में करीब 220 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।
इस साल यूरोप में मई से लगातार रिकॉर्ड तापमान दर्ज किए गए। जर्मनी में जून के अंत में लगातार तीन दिनों तक तापमान के रिकॉर्ड टूटे और 46 मौसम केंद्रों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। स्पेन में कई स्थानों पर तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी का असर केवल सीधे लू लगने से होने वाली मौतों तक सीमित नहीं है। तेज गर्मी पहले से मौजूद हृदय और सांस संबंधी बीमारियों को गंभीर कर सकती है, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए गर्मी से संबंधित वास्तविक मौतों का आंकड़ा अक्सर आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्रों में सीधे दिखाई नहीं देता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई में कहा था कि यूरोपीय क्षेत्र में गर्मी से संबंधित मृत्यु दर पिछले दो दशकों में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। जलवायु परिवर्तन और यूरोप की बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है।
–आईएएनएस
केआर/
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