वाशिंगटन, 26 सितंबर (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आने वाले समय में काम करने की उत्पादकता को 3.8 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक नई वर्किंग रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यह रिपोर्ट विकसित देशों के पेटेंट और रोजगार के डेटा का विश्लेषण करके तैयार की गई है।
आईएमएफ ने शुक्रवार को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड एग्रीगेट लेबर प्रोडक्टिविटी: एविडेंस फ्रॉम पेटेंट डेटा’ नाम से यह वर्किंग पेपर प्रकाशित किया।
शोधकर्ताओं ने ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) से जुड़े देशों के पेटेंट डेटा का इस्तेमाल किया और 2000 से 2017 के बीच एआई के प्रभाव का अध्ययन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 के बाद एआई तकनीक से जुड़े पेटेंट जारी होने की रफ्तार तेजी से बढ़ी और 2017 तक यह तीन गुना से ज्यादा हो गई।
इस दौरान दुनिया भर में जारी हुए कुल एआई-संबंधित पेटेंट में से लगभग 89 प्रतिशत अकेले ओईसीडी देशों के हिस्से में थे। रिसर्च में प्रोडक्शन-फंक्शन अप्रोच का इस्तेमाल करके देखा गया कि क्या एआई पेटेंट एप्लीकेशनों की बढ़ती रफ्तार का असर प्रति कर्मचारी उत्पादन पर भी पड़ा है।
अध्ययन में पाया गया कि एआई से जुड़ी इनोवेशन का असर पहले से ही दिखने लगा है। 2000 से 2017 के बीच एआई पेटेंट गतिविधि के कारण प्रति कर्मचारी उत्पादन में 0.8 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत के बीच बढ़ोतरी हुई है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भविष्य में एआई इनोवेशन से उत्पादकता में कहीं बड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि टेक्नोलॉजी का विकास तेज हो रहा है और यह ज्यादा इंडस्ट्रीज में फैल रही है। 3.8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का अनुमान लॉन्ग टर्म के लिए है और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विभिन्न सेक्टर्स में एआई तकनीक का विकास और इस्तेमाल कितनी तेजी से होता है।
हालांकि, इसका फायदा सभी देशों या सभी तरह की नौकरियों में एक जैसा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन देशों में प्रोफेशनल और मैनेजेरियल पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है, वहां एआई से उत्पादकता में ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। इससे संकेत मिलता है कि एआई तब ज्यादा आर्थिक फायदा देता है जब वह स्किल्ड कर्मचारियों के काम को सपोर्ट करता है, न कि सिर्फ उनके काम को रिप्लेस करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका फायदा तुरंत नहीं दिखेगा। कर्मचारियों को नए सिस्टम को सीखने और अपने रोजमर्रा के काम में इसे प्रभावी ढंग से शामिल करने में समय लगेगा। इसलिए कर्मचारी और कंपनियां एआई को कितनी तेजी से अपनाते हैं, यही तय करेगा कि उत्पादन कितनी जल्दी बढ़ेगा।
लेबर-मार्केट में लचीलापन भी उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर कर्मचारी आसानी से उन नौकरियों और इंडस्ट्रीज में जा सकें जहां एआई का सबसे बेहतर इस्तेमाल हो सकता है, तो फायदा ज्यादा होगा।
शोधकर्ताओं ने कहा कि देशों के बीच टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान को ध्यान में रखने के बाद भी उनके निष्कर्ष मजबूत रहे हैं। ऐसा तब होता है जब एक देश में विकसित एआई तकनीक को दूसरे देश में अपनाया या बदला जाता है।
भारत भी एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी-आधारित आर्थिक विकास पर जोर दे रहा है। ऐसे में देश के बड़े आईटी सेक्टर और स्किल्ड वर्कर्स के कारण उत्पादकता, ट्रेनिंग और वर्कफोर्स की गतिशीलता जैसे मुद्दे और भी अहम हो जाते हैं।
–आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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