वाशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। जरूरी मिनरल्स में चीन के दबदबे को लेकर अमेरिका की चिंता काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि अमेरिका की दिलचस्पी गहरे समुद्र में माइनिंग में फिर से बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञों ने कानून बनाने वालों को चेतावनी दी है कि लहरों के नीचे के इकोलॉजिकल रिस्क को अभी भी ठीक से समझा नहीं गया है।
कांग्रेस की सुनवाई में सीनेटरों और इंडस्ट्री के नेताओं ने कोबाल्ट, निकल और कॉपर जैसे मिनरल्स के लिए सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की जरूरत पर जोर दिया, जो डिफेंस सिस्टम, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी हैं।
कांग्रेस के सदस्य स्कॉट फ्रैंकलिन ने कहा कि ये संसाधन हमारे देश भर की इंडस्ट्रीज के लिए बहुत जरूरी हैं और चेतावनी दी कि चीन जैसे दुश्मन बेशक अमेरिका को कमजोर करने की कोशिश करेंगे।
इंडस्ट्री के अधिकारियों ने तर्क दिया कि अमेरिका के पास आगे बढ़ने के लिए टेक्नोलॉजी और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क दोनों हैं। द मेटल्स कंपनी के सीईओ जेरार्ड बैरन ने लॉमेकर्स से कहा कि “हम रिस्क को मैनेज करने के लिए काफी कुछ जानते हैं।” इस दौरान उन्होंने दशकों की रिसर्च और हाल की तरक्की की ओर इशारा किया, जो एनवायरनमेंटल डिस्टर्बेंस को कम करती हैं।
बैरन ने कहा कि समुद्र की गहराइयों में मौजूद खनिज गांठें अमेरिका की आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि इनमें ऐसे धातु पाए जाते हैं जो रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद अहम हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीकें समुद्र तल पर लगभग अदृश्य तरंगों के साथ काम करती हैं और पर्यावरण पर असर को बहुत सीमित क्षेत्र तक ही रखती हैं। हालांकि, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि माइनिंग में तेजी लाने की कोशिश शायद जल्दबाजी होगी।
डीप-सी इकोलॉजिस्ट डॉ. एस्ट्रिड लिटनर ने कहा, “डीप-सी माइनिंग के जिम्मेदार विकास के लिए सबसे अच्छा उपलब्ध डेटा काफी नहीं है।” बातचीत के दौरान उन्होंने बायोडायवर्सिटी, इकोसिस्टम के काम और लंबे समय के असर पर बेसलाइन डेटा में कमियों के बारे में बताया।
उन्होंने चेतावनी दी कि माइनिंग से बायोडायवर्सिटी का नुकसान और संभावित विलुप्ति हो सकती है, जिसके असर लंबे समय तक रह सकते हैं या जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।
सभी पार्टियों के सांसदों ने अनिश्चितता के पैमाने को माना। रैंकिंग सदस्य गेबे एमो ने कहा कि समुद्र धरती पर सबसे कम समझे जाने वाले इकोसिस्टम में से एक है और गलत कदमों के नतीजे लंबे समय तक रह सकते हैं और कुछ मामलों में जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।
सुनवाई में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समुद्र के कितने कम हिस्से की मैपिंग या खोज की गई है। सेल्ड्रोन के ब्रायन कॉनन ने कहा कि “अमेरिका ईईजेड का सिर्फ 54 फीसदी हिस्सा ही मैप किया गया है, जिससे अमेरिकी पानी के बड़े हिस्से बिना शोध के रह गए हैं।”
पुराने एक्सप्लोरर रॉबर्ट बैलार्ड ने सांसदों को बताया कि इंसानों ने अभी तक सिर्फ गहरे समुद्र का 0.001 फीसदी ही देखा है और इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बड़े पैमाने पर कमर्शियल गतिविधि से पहले उसके बारे में अधिक जानकारी होना चाहिए।
अनिश्चितताओं के बावजूद, जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटिशन इस बहस को तेज कर रहा है। अमेरिकी सीनेटरों ने बार-बार मिनरल प्रोसेसिंग और समुद्री रिसर्च में चीन की बढ़त की ओर इशारा किया। चीन दुनिया के लगभग 70 फीसदी रेयर अर्थ एलिमेंट्स का प्रोडक्शन करता है और उसने मैपिंग और एक्सप्लोरेशन क्षमताओं में भारी निवेश किया है।
गहरे समुद्र में माइनिंग के सपोर्टर कहते हैं कि कार्रवाई न करने पर अमेरिका विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि बहुत तेजी से काम करने से इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचने का खतरा है, जो क्लाइमेट को रेगुलेट करने, मछली पालन का समर्थन करने और समुद्र की सेहत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
–आईएएनएस
केके/एएस
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