जिस बलूच एक्टिविस्ट को पाकिस्तान में मिली उम्र कैद की सजा, वो नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट

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क्वेटा, 27 जून (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तानी अदालत ने बलूच एक्टिविस्ट महरंग बलोच को उम्र कैद की सजा सुनाई। पूरी दुनिया में इस ज्यादती के खिलाफ आवाज बुलंद की जा रही है। इस कार्यकर्ता को दूसरी बार प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने इसकी घोषणा की। यह घोषणा शुक्रवार देर रात ऐसे समय में की गई, जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में महरंग बलोच सहित चार कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास की…

क्वेटा, 27 जून (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तानी अदालत ने बलूच एक्टिविस्ट महरंग बलोच को उम्र कैद की सजा सुनाई। पूरी दुनिया में इस ज्यादती के खिलाफ आवाज बुलंद की जा रही है। इस कार्यकर्ता को दूसरी बार प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है।

मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने इसकी घोषणा की।

यह घोषणा शुक्रवार देर रात ऐसे समय में की गई, जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में महरंग बलोच सहित चार कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना हुई थी।

बीवाईसी ने एक बयान में कहा, “यह नामांकन जनवरी 2026 में हुआ था, लेकिन संगठन की नीति के तहत इसे उस समय सार्वजनिक नहीं किया गया। आज इस तथ्य को सार्वजनिक करना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि जिस व्यक्ति को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद के झूठे और निराधार आरोपों के जरिए दंडित करने की कोशिश की, उसी व्यक्ति को दुनिया अब शांति, न्याय और मानवाधिकारों के संघर्ष के प्रतीक के रूप में पहचान रही है।”

संगठन ने कहा कि महरंग बलोच का दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित होना इस बात का प्रमाण है कि बीवाईसी का संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित है। वहीं, संगठन के नेताओं के खिलाफ राज्य की कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध और दमन को दर्शाती है।

बीवाईसी ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और सैन्य अभियानों के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई बलूच नेताओं के खिलाफ मनगढ़ंत एफआईआर, बेबुनियाद आरोप और अपारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं।

संगठन का दावा है कि महरंग बलोच और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और सैन्य अभियानों में और तेजी आई है, जिसका असर आम बलूच नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है।

बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक ताकतों से बलूचिस्तान की स्थिति पर प्रभावी आवाज उठाने तथा महरंग बलोच सहित अन्य बलूच नेताओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

वहीं, एक अन्य मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि महरंग बलोच का दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बीवीजे ने कहा, “जब पाकिस्तान सरकार राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों के जरिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दे रही है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके मानवाधिकारों और न्याय के प्रति शांतिपूर्ण समर्पण को मान्यता दे रहा है।”

संगठन ने कहा कि यह नामांकन बलूचिस्तान की मानवाधिकार स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सक्रिय हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा, शांतिपूर्ण गतिविधियों के कारण जेल में बंद लोगों की रिहाई और दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

–आईएएनएस

केआर/

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