ढाका, 17 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन की एक नई लहर शुरू हो गई है। ढाका और देश के दूसरे शहरों में जेन-जी सड़कों पर उतर आए हैं। यह प्रदर्शन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार के सत्ता में आने के करीब पांच महीने बाद शुरू हुआ है।
हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (एचएससी) और अन्य समकक्ष परीक्षाओं के दौरान खराब मौसम की वजह से तनाव हो गया। दो जुलाई से शुरू हुई परीक्षाओं में करीब 13 लाख छात्र शामिल हुए थे। जुलाई के दूसरे हफ्ते में लगातार तेज बारिश के कारण परीक्षाएं प्रभावित हुईं। भारी बारिश से चटगांव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई और ढाका और चटगांव जैसे बड़े शहरों में पानी भर गया।
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से बांग्लादेश के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने चटगांव शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में परीक्षाएं स्थगित कर दीं। बाकी शिक्षा बोर्डों में परीक्षाएं तय समय पर जारी रखीं। मंत्रालय के फैसले से छात्रों में नाराजगी फैल गई।
ऑनलाइन पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट में बताया गया कि चटगांव में बाढ़ की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। कोमिला समेत कई अन्य जगहों पर भी मौसम बहुत खराब था। कई छात्रों को घुटने तक भरे पानी से गुजरकर परीक्षा केंद्र पहुंचना पड़ा। वे बारिश में भीगते हुए और तूफान का सामना करते हुए परीक्षा देने पहुंचे और परीक्षा दी। ऐसी मुश्किल स्थिति के बाद छात्रों और उनके माता-पिता के बीच गुस्सा बढ़ गया।
ऐसे में बांग्लादेश के शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन ने एक महिला छात्रा के अभिभावक से फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद छात्रों की नाराजगी और बढ़ा दी।
वायरल ऑडियो में छात्राओं को मंत्री की ‘फार्म की मुर्गियां’ वाली टिप्पणी से छात्रों में काफी गुस्सा फैल गया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए ‘द डिप्लोमैट’ ने बताया कि बांग्लादेश के कम से कम 13 जिलों में छात्रों ने प्रदर्शन किए। इनमें ढाका, चटगांव और कोमिल्ला जैसे जिले शामिल थे। छात्रों ने सड़कें जाम कीं, शिक्षा बोर्डों के कार्यालयों का घेराव किया और रैलियां निकालीं। ढाका में प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्य चौराहों को जाम कर दिया और व्यंग्य भरे नारे लगाए।
बढ़ते विरोध के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 14 जुलाई को संसद भवन में शिक्षा मंत्री मिलन के साथ आपात बैठक की। इसके बाद मिलन ने संसद में अपने बयान के लिए माफी मांगी। उन्होंने माना कि तेज बारिश और जलभराव के कारण छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
15 जुलाई को उन्होंने घोषणा की कि जो छात्र परीक्षा नहीं दे पाए हैं, उनके लिए दोबारा परीक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
रिपोर्ट में इस पूरे मामले के बड़े असर को लेकर कहा गया कि सरकार को भविष्य में ऐसे मामलों को बढ़ने से रोकने के लिए ज्यादा संवेदनशीलता, बेहतर तैयारी और ईमानदारी दिखानी होगी। एक संवेदनशील और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अच्छी शिक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए छात्रों की भावनाओं और उनकी परेशानियों का सम्मान करना जरूरी है।
–आईएएनएस
एवाई/वीसी
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