बांग्लादेश में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस का लाठीचार्ज, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की हुई आलोचना

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पेरिस, 17 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों में एचएससी छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। संसद के बाहर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज और बल का प्रयोग किया। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश के अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। इस प्रदर्शन में देश के शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन के इस्तीफे की मांग की गई थी। विरोध प्रदर्शन 14 जुलाई की सुबह शुरू हुए, जिसमें हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (एचएससी) के उम्मीदवारों ने मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया, जुलूस निकाले और ढाका में मानव श्रृंखला बनाई। बांग्लादेशी अखबार…

पेरिस, 17 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों में एचएससी छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। संसद के बाहर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज और बल का प्रयोग किया। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश के अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। इस प्रदर्शन में देश के शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन के इस्तीफे की मांग की गई थी।

विरोध प्रदर्शन 14 जुलाई की सुबह शुरू हुए, जिसमें हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (एचएससी) के उम्मीदवारों ने मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया, जुलूस निकाले और ढाका में मानव श्रृंखला बनाई। बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पार्लियामेंट बिल्डिंग की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट के अनुसार, स्टूडेंट्स एचएससी परीक्षा के समय, खराब मौसम के बीच परीक्षा कराने के फैसले, प्रश्न पत्र की खराब क्वालिटी और मंत्री द्वारा छात्रों को ‘फार्म चिकन’ कहने वाली टिप्पणी से छात्रों में नाराजगी है। इसी नाराजगी का हवाला देते हुए छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने कहा कि शांति से इकट्ठा होने के खिलाफ बल का इस्तेमाल बांग्लादेश के संविधान के तहत मिली बोलने की आजादी, शांति से इकट्ठा होने और निजी आजादी के अधिकारों के खिलाफ है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि यह घटना विशेष रूप से नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा (आईसीसीपीआर), बाल अधिकार सम्मेलन (सीआरसी), यातना के विरुद्ध सम्मेलन (सीएटी) और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) में संरक्षित अधिकारों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत गंभीर चिंताएं भी पैदा करती है।

संगठन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या एचएससी के परीक्षार्थियों की थी और उनमें कई नाबालिग भी हो सकते थे। ऐसे में राज्य का दायित्व था कि वह अत्यधिक संयम बरतता और बच्चों तथा किशोरों को विशेष सुरक्षा प्रदान करता।

घटना की निंदा करते हुए जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहानूर इस्लाम ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अनावश्यक या अत्यधिक बल प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। बच्चों और किशोर छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के लिहाज से विशेष रूप से चिंताजनक है। शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का जवाब कभी लाठीचार्ज से नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि राज्य को संवाद, सहिष्णुता और कानून के शासन के प्रति सम्मान के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।”

जेएमबीएफ ने बांग्लादेश के अधिकारियों से कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विशेषज्ञों की देखरेख में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच करें; नतीजों को सार्वजनिक करें और सही कानूनी कार्रवाई के जरिए जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदार ठहराएं।

इसने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे घायल स्टूडेंट्स को सही मेडिकल इलाज, रिहैबिलिटेशन, साइकोसोशल सपोर्ट और असरदार इलाज दें और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले छात्रों को परेशान करने, मनमाने ढंग से गिरफ्तार करने या बदले की कार्रवाई करने से बचें।

–आईएएनएस

केके/पीएम

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