नेपाल के विराटनगर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट पर पहली कंटेनर मालगाड़ी पहुंची, लॉजिस्टिक्स लागत होगी कम

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काठमांडू, 21 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्वी नेपाल के विराटनगर में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) पर सोमवार को तीसरे देशों से इंपोर्ट किया गया औद्योगिक कच्चा माल ले जाने वाली पहली मालगाड़ी (कार्गो ट्रेन) पहुंची। चूंकि पिछले साल नेपाल-भारत ट्रांजिट संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन किया गया था, ताकि नेपाल को विराटनगर आईसीपी पर थोक और कंटेनर कार्गो रेल सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति मिल सके, यह पहली बार है कि भारतीय सहायता से निर्मित आईसीपी को सीधी कार्गो ट्रेन मिली है। पिछले वर्ष नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के बाद नेपाल को बिराटनगर एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) के…

काठमांडू, 21 जुलाई (आईएएनएस)। पूर्वी नेपाल के विराटनगर में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) पर सोमवार को तीसरे देशों से इंपोर्ट किया गया औद्योगिक कच्चा माल ले जाने वाली पहली मालगाड़ी (कार्गो ट्रेन) पहुंची।

चूंकि पिछले साल नेपाल-भारत ट्रांजिट संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन किया गया था, ताकि नेपाल को विराटनगर आईसीपी पर थोक और कंटेनर कार्गो रेल सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति मिल सके, यह पहली बार है कि भारतीय सहायता से निर्मित आईसीपी को सीधी कार्गो ट्रेन मिली है।

पिछले वर्ष नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के बाद नेपाल को बिराटनगर एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) के माध्यम से बल्क और कंटेनर दोनों प्रकार की रेल माल ढुलाई सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति मिली थी। इसके बाद भारतीय सहयोग से निर्मित बिराटनगर आईसीपी पर पहली बार सीधे मालगाड़ी पहुंची है।

बिराटनगर कस्टम्स कार्यालय के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी उमेश श्रेष्ठ ने आईएएनएस से कहा, “स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले कैनोला अनाज से भरे 40 कंटेनरों वाली मालगाड़ी सोमवार को आईसीपी पहुंची। भारतीय बंदरगाह से सीधे रेल माल सेवा की शुरुआत के उपलक्ष्य में मंगलवार दोपहर आईसीपी में एक औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।”

यह खेप कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीओएनसीओआर) द्वारा संचालित मालगाड़ी से लाई गई। सभी कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ईसीटीएस) लगाया गया था, जिससे पूरे मार्ग के दौरान माल की निगरानी की जा सकी।

नेपाल के कोलकाता स्थित महावाणिज्य दूतावास ने पहले जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि यह मालगाड़ी 17 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुई थी। इसमें 40 उच्च क्षमता वाले कंटेनर थे, जिन्हें बिराटनगर आईसीपी स्थित कस्टम्स यार्ड तक पहुंचाया गया।

इस पहली मालगाड़ी सेवा को नेपाल के कोलकाता स्थित महावाणिज्य दूत झक्का प्रसाद आचार्य ने कोलकाता कस्टम्स, कोलकाता पोर्ट और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उमेश श्रेष्ठ ने कहा, “अब इस आईसीपी पर नियमित रूप से मालगाड़ियां आएंगी। मुझे यह भी जानकारी मिली है कि नेपाली आयातक निकट भविष्य में उर्वरक और स्पंज आयरन की रेल परिवहन सुविधा के लिए कॉनकॉर के साथ बातचीत कर रहे हैं।”

नवंबर 2025 में नेपाल और भारत ने नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के लिए लेटर ऑफ एक्सचेंज (एलओई) पर हस्ताक्षर किए थे। इस संशोधन के बाद तीसरे देशों से आने वाले बल्क और कंटेनरयुक्त माल को रेल मार्ग के जरिए सीधे बिराटनगर आईसीपी तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया।

हालांकि, इस प्रावधान को लागू होने में भारत में लंबी प्रशासनिक और नौकरशाही प्रक्रियाओं के कारण कई महीने लग गए।

इससे पहले, नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल के तहत केवल चार प्रकार की बल्क वस्तुओं, कोयला, क्लिंकर, सीमेंट और उर्वरक, को ही तीसरे देशों से रेल मार्ग के जरिए बिराटनगर आईसीपी तक लाने की अनुमति थी। संशोधित प्रोटोकॉल के बाद अब तीसरे देशों से आने वाले सभी प्रकार के सामान को रेल के माध्यम से पश्चिमी नेपाल के भैरहवा सीमा शुल्क केंद्र तक भी पहुंचाया जा सकेगा।

सोमवार को बिराटनगर आईसीपी पर कंटेनरयुक्त माल की पहली खेप पहुंचने से पहले, भारतीय समुद्री बंदरगाहों से आने वाले कंटेनरयुक्त आयात के लिए रक्सौल (भारत) के निकट स्थित बीरगंज आईसीपी ही नेपाल का एकमात्र रेल-संपर्क वाला सीमा शुल्क केंद्र था।

उमेश श्रेष्ठ ने कहा, “बिराटनगर आईसीपी से जुड़ी रेल सेवा शुरू होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में 20 से 30 फीसदी तक की कमी आने की उम्मीद है।”

रेल सर्विस से पोर्ट डेमरेज चार्ज, कंटेनर डिटेंशन फीस और नेपाली इंपोर्टर्स के एक्स्ट्रा रोड ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम होने से खर्च कम होगा। इससे ट्रेड में भी आसानी होगी और नेपाली उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।

श्रेष्ठा ने कहा, “पहले, इंपोर्टर्स को कोलकाता से तीसरे देश का सामान ट्रांसपोर्ट करने के लिए ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसे अब कंटेनर वाली रेल से ज्यादा अच्छे से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।”

–आईएएनएस

केके/पीएम

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