ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक विकास संबंधी डिसऑर्डर है जो बच्चे की बातचीत करने और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) बच्चों के मानसिक विकास पर असर डालता है, जिससे उन्हें रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करने और दूसरों से घुलने-मिलने में दिक्कत होती है।
Signs of Autism in Toddlers (AI Generated)
Signs of Autism in Toddlers: क्या आपका बच्चा भी बुलाने पर नहीं सुनता? या आपसे नजरें नहीं मिलाता? या फिर ठीक से बोल भी नहीं पाता है? ऐसा 1-2 बार होना आम बात है, लेकिन अगर ऐसा काफी समय से हो रहा है, तो ये चिंताजनक है। हो सकता है आपका बच्चा ऑटिज्म का शिकार हो। यह कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि एक डिसऑर्डर है। मेडिकल साइंस में इसे ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर’ कहते हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास पर असर डालती है। इससे पीड़ित बच्चों के लिए रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके लक्षण बचपन के शुरुआती सालों में ही दिखने लगते हैं, लिहाजा आपको ध्यान देने की जरुरत होती है।
आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में हर 60-65 में से 1 बच्चा ऑटिज्म का शिकार है। इसलिए हर माता-पिता को शुरुआत से ही अपने बच्चे की आदतों और हरकतों पर नजर रखनी चाहिए, जिससे इसका इलाज किया जा सके।
ऑटिज्म क्या है? (Autism Spectrum Disorder in Children)
ऑटिज्म यानी की ‘स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर’ बच्चे के बातचीत करने और लोगों से घुलने-मिलने के तरीके पर गहरा असर डालता है। इससे बच्चे का व्यवहार, पसंद-नापसंद और सोशल सर्कल बदल जाता है। आमतौर पर 2 से 3 साल की उम्र में इसका पता चल जाता है। इस बीमारी में बच्चे का दिमाग आम बच्चों की तुलना में अलग तरह से काम करता है। इसके लक्षण हर बच्चे में कम या ज्यादा हो सकते हैं। कुछ बच्चे नॉर्मल स्कूल जा पाते हैं, तो कुछ को इसमें भी खास मदद की जरूरत होती है। इसका इलाज दवाइयों से नहीं बल्कि थेरेपी से ही किया जा सकता है। सही थेरेपी की मदद से बच्चों की हालत में काफी सुधार हो सकता है।
बच्चों में ऑटिज्म की पहचान कैसे करें? (Signs of Autism in Toddlers)
Signs of Autism in Toddlers (Magnific)
ऑटिज्म के कारण बच्चे में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। यहां पर कुछ आम लक्षणों (Autism Symptoms in Kids) के बारे में बताया गया है।
नाम पुकारने पर बच्चे का कोई जवाब न देना।
बात करते समय आंखें न मिलाए।
एक ही बात को या एक ही काम को बार-बार दोहराना।
एक काम छोड़कर अचानक दूसरा काम करने में दिक्कत आना।
दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने के बजाय अकेले रहकर खेलना पसंद करे।
किन बच्चों को इसका खतरा ज्यादा होता है?
रिसर्च के अनुसार, समय से पहले जन्मे बच्चों (प्रीमैच्योर), कम वजन वाले शिशुओं या जिनके परिवार में पहले से किसी को ऑटिज्म रहा हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है। कुछ रिसर्च ये भी बताते हैं कि जो बच्चे पूरी नींद नहीं लेते, उनमें भी ऑटिज्म का जोखिम बढ़ जाता है। बचपन में नींद की कमी दिमाग के विकास पर बुरा असर डालती है, जिससे बच्चों में आम बच्चों की तरह दूसरों से घुलने-मिलने में दिक्कत आने लगती है।
क्या ऑटिज्म पूरी तरह ठीक हो सकता है? (Can Autism be Cured)
Signs of Autism in Toddlers (Magnific)
डॉक्टरों के मुताबिक, ऑटिज्म का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन अगर सही समय पर इसकी पहचान हो जाए और इसकी थेरेपी शुरू कर दी जाए, तो बच्चे की सीखने और दूसरों से घुलने-मिलने की क्षमता में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है। इससे बचाव के लिए प्रेगनेंसी के दौरान सही खान-पान, रूटीन चेकअप, इंफेक्शन से बचाव और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बहुत जरूरी होता है। अगर 2 से 3 साल की उम्र में बच्चे में कोई भी असामान्य व्यवहार दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जितनी जल्दी थेरेपी शुरू होगी, उतनी जल्दी बच्चे में भी सुधार होगा।
खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।