भारतीय-अमेरिकी लेखक ने युवा पीढ़ी के लिए हिंदू धर्म को सरल तरीके से समझाने की कोशिश की

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वाशिंगटन, 13 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की लेखिका उषा महाजन ने बच्चों के लिए हिंदू धर्म को बेहद आसान और दिलचस्प अंदाज में समझाने की कोशिश की। उनकी नई चित्रों से सजी किताब “हिंदू धर्म की खोज: दया, सत्य और प्रेम का शाश्वत मार्ग” इन दिनों खास चर्चा में है। यह किताब खासतौर पर 6 से 12 साल के बच्चों के लिए तैयार की गई है, ताकि वे हिंदू धर्म की मूल भावना को सरल भाषा में समझ सकें। 63 पन्नों की इस किताब में हिंदू धर्म को किसी जटिल धार्मिक बहस की तरह नहीं बल्कि…

वाशिंगटन, 13 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की लेखिका उषा महाजन ने बच्चों के लिए हिंदू धर्म को बेहद आसान और दिलचस्प अंदाज में समझाने की कोशिश की। उनकी नई चित्रों से सजी किताब “हिंदू धर्म की खोज: दया, सत्य और प्रेम का शाश्वत मार्ग” इन दिनों खास चर्चा में है। यह किताब खासतौर पर 6 से 12 साल के बच्चों के लिए तैयार की गई है, ताकि वे हिंदू धर्म की मूल भावना को सरल भाषा में समझ सकें।

63 पन्नों की इस किताब में हिंदू धर्म को किसी जटिल धार्मिक बहस की तरह नहीं बल्कि दयालुता, सत्य और प्रेम पर आधारित जीवन पद्धति के रूप में पेश किया गया है। ओहायो में रहने वाली उषा महाजन ने इसे परिवारों और स्कूलों में पढ़ने योग्य बनाने की कोशिश की है।

किताब की शुरुआत “हिंदू धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है। इसकी शुरुआत भारत में हुई और यह सभी जीवों के प्रति दया, सत्य और सम्मान सिखाता है” लाइन से होती है।

लेखिका ने धर्म, कर्म, अहिंसा, मोक्ष और सेवा जैसे हिंदू दर्शन के अहम सिद्धांतों को छोटे-छोटे उदाहरणों और कहानियों के जरिए समझाया है। ‘धर्म’ को रोजमर्रा की जिंदगी में सही तरीके से जीने की कला बताया गया है, जिसमें सत्य बोलना, दया रखना, अहिंसा और दान जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया है।

किताब की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और आकर्षक चित्र हैं। मंदिरों, परिवारों, ऋषि-मुनियों और त्योहारों से जुड़े रंगीन चित्र बच्चों को आसानी से जोड़ते हैं। ‘ईश्वर एक, रूप अनेक’ वाले अध्याय में ईश्वर की तुलना इंद्रधनुष के अलग-अलग रंगों से की गई है, जो एक ही प्रकाश से निकलते हैं।

उषा महाजन ने किताब में हिंदू धर्म से जुड़े कई भ्रमों को भी दूर करने की कोशिश की है। एक अध्याय में बताया गया है कि मूल हिंदू शिक्षाएं जाति भेद नहीं, बल्कि व्यक्ति के कर्म और योग्यता पर आधारित थीं। वहीं मूर्ति पूजा को लेकर कहा गया है कि हिंदू पत्थर या मिट्टी की पूजा नहीं करते, बल्कि मूर्तियों को ईश्वर से जुड़ने का माध्यम मानते हैं।

रामायण, महाभारत और भगवद गीता जैसे ग्रंथों को भी बच्चों की समझ के अनुसार सरल भाषा में पेश किया गया है। किताब इन ग्रंथों को केवल धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि साहस, जिम्मेदारी और भक्ति सिखाने वाली जीवन गाइड बताती है।

उषा महाजन पेशे से रिटायर्ड मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं और उन्होंने ओहायो में मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति केंद्र की सह-स्थापना भी की थी। उनका कहना है कि यह किताब हिंदू दर्शन और मूल्य आधारित शिक्षा से प्रेरित है।

हाल के वर्षों में अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों के बीच बच्चों को भारतीय संस्कृति और हिंदू विचारधारा से जोड़ने वाली किताबों की मांग तेजी से बढ़ी है। योग, ध्यान, कर्म और माइंडफुलनेस जैसे विषय अब दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुके हैं और यही वजह है कि इस तरह की किताबें नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं।

–आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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