वाशिंगटन, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “60 दिन से ज्यादा युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।”
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हेगसेथ ने यह बात तब कही जब डेमोक्रेटिक सेनेटर टिम केन ने गुरुवार को कांग्रेस की सुनवाई में उनसे पूछा कि ट्रंप प्रशासन, ईरान के साथ युद्ध के 60 दिन पूरे होने पर, कानून के मुताबिक क्या कांग्रेस से इजाजत मांगेगा?
हेगसेथ ने कहा कि ईरान के साथ जो सीजफायर (संघर्ष विराम) हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक गई है। अमेरिका-ईरान जंग 7 अप्रैल को रुक गया था। इसका मतलब है कि संघर्ष करीब 40 दिन चला।
28 फरवरी को, इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के दूसरे शहरों पर मिलकर हमले किए थे, जिसमें ईरान के उस समय के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, सीनियर कमांडर और बड़ी संख्या में आम लोग मारे गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को ईरान के खिलाफ मिलिट्री कैंपेन के बारे में बताया, जिससे 1 मई 60 दिन का माइलस्टोन बन गया, जिसके बाद यूएस वॉर पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से मंजूरी मिलने तक युद्ध को खत्म करना होगा।
वहीं, इस हफ्ते की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप ने फोन पर बात की। क्रेमलिन के अनुसार, दोनों ने व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुई हालिया शूटिंग, ईरान के हालात और यूक्रेन संकट पर चर्चा की।
डेढ़ घंटे से ज्यादा चली फोन पर बातचीत के बाद बुधवार को रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर में ट्रंप पर जानलेवा हमले की कड़ी निंदा की, और खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह की सियासी मंशा से प्रेरित हिंसा मंजूर नहीं है।
क्रेमलिन के मुताबिक, इंटरनेशनल एजेंडा के मुद्दों में से, दोनों नेताओं ने मुख्य रूप से ईरान और फारस की खाड़ी के हालात पर फोकस किया। उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने सीजफायर बढ़ाने के ट्रंप के फैसले को सही कदम माना, क्योंकि इससे हालात को स्थिर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि पुतिन ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि अगर अमेरिका और इजरायल फिर से ताकत का इस्तेमाल करते हैं, तो न सिर्फ ईरान और उसके पड़ोसियों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
–आईएएनएस
केआर/
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