अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में सीआईए ने विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और जेलों के इस्तेमाल की जांच की

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वाशिंगटन, 5 जुलाई (आईएएनएस)। इस हफ्ते हुई कांग्रेस की एक सुनवाई में अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के कोल्ड वॉर के दौर के एमके-अल्ट्रा प्रोग्राम की फिर से जांच शुरू हुई। इसमें सांसदों और एक्सपर्ट गवाहों ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने दशकों तक इस प्रोग्राम के दायरे को छिपाए रखा और अमेरिका में यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल, जेल और दूसरी जगहों का इस्तेमाल करके बिना जानकारी वाले लोगों पर ‘माइंड-कंट्रोल’ (दिमाग पर काबू पाने) के एक्सपेरिमेंट किए। फेडरल सीक्रेट्स को सार्वजनिक करने के मामले में ‘हाउस ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी कमेटी’ की टास्क फोर्स ने इतिहासकार स्टीफन किन्जर और पत्रकार टॉम ओ’नील के…

वाशिंगटन, 5 जुलाई (आईएएनएस)। इस हफ्ते हुई कांग्रेस की एक सुनवाई में अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के कोल्ड वॉर के दौर के एमके-अल्ट्रा प्रोग्राम की फिर से जांच शुरू हुई। इसमें सांसदों और एक्सपर्ट गवाहों ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने दशकों तक इस प्रोग्राम के दायरे को छिपाए रखा और अमेरिका में यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल, जेल और दूसरी जगहों का इस्तेमाल करके बिना जानकारी वाले लोगों पर ‘माइंड-कंट्रोल’ (दिमाग पर काबू पाने) के एक्सपेरिमेंट किए।

फेडरल सीक्रेट्स को सार्वजनिक करने के मामले में ‘हाउस ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी कमेटी’ की टास्क फोर्स ने इतिहासकार स्टीफन किन्जर और पत्रकार टॉम ओ’नील के बयान सुने। उन्होंने तर्क दिया कि सीआईए प्रोग्राम के अहम पहलू अभी भी छिपे हुए हैं, क्योंकि कई रिकॉर्ड जान-बूझकर नष्ट कर दिए गए थे या उनमें से कई जानकारियां हटा दी गई थीं।

सुनवाई की शुरुआत करते हुए टास्क फोर्स की अध्यक्ष अन्ना पॉलिना लुना ने कहा कि एमके-अल्ट्रा प्रोग्राम न तो कोई पॉलिसी की विफलता थी और न ही कोई ऐसा अति-उत्साही कार्यक्रम, जो नियंत्रण से बाहर हो गया हो।

उन्होंने कहा, “यह सरकार का एक सोच-समझकर और व्यवस्थित तरीके से चलाया गया ऑपरेशन था, जिसमें अमेरिकी नागरिकों, कैदियों, अस्पताल के मरीजों, पूर्व सैनिकों और आम लोगों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना एलएसडी, इलेक्ट्रोशॉक, सम्मोहन (हिप्नोसिस), सेंसरी डिप्राइवेशन (इंद्रियों को संवेदना से वंचित रखना) और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया।”

लुना ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सीआईए निदेशक रिचर्ड हेल्स ने 1973 में पद छोड़ने से पहले एमके-अल्ट्रा फाइलकों को नष्ट करने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने ‘न्याय में बाधा’ और ‘संघीय अभिलेखों का आपराधिक विनाश’ बताया।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि एमके-अल्ट्रा के अतिरिक्त अभिलेखों की खोज की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने और प्रतिनिधि एरिक बर्लिसन ने हाल ही में सीआईए मुख्यालय का दौरा किया था।

लुना ने कहा, “सीआईए वर्तमान में हाल ही में मिले दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में है। उन्होंने आगे कहा कि ये रिकॉर्ड एमके-अल्ट्रा के तहत चलाए जा रहे एक जालसाजी कार्यक्रम से संबंधित हैं।

पॉइजनर इन चीफ के लेखक किंजर ने गवाही दी कि यह प्रोग्राम अमेरिका और विदेशों में जेलों, क्लीनिकों और सेफ हाउस तक फैला हुआ था।

उन्होंने कहा, “इंसान के दिमाग और शरीर को खत्म करने के तरीकों की तलाश में एमके-अल्ट्रा ने मानव पर अब तक के सबसे खतरनाक एक्सपेरिमेंट किए, जो किसी अमेरिकी सरकारी एजेंसी ने कभी नहीं किए।” उन्होंने कहा कि किसी भी स्टैंडर्ड से वे मेडिकल टॉर्चर के तौर पर सही हैं।

उन्होंने कहा कि बचे हुए रिकॉर्ड दिखाते हैं कि एमके-अल्ट्रा में कम से कम 149 सबप्रोजेक्ट्स थे, जिनमें 80 से ज्यादा इंस्टीट्यूशन और 185 नॉन-गवर्नमेंट रिसर्चर शामिल थे।

किंजर ने कांग्रेस से डीक्लासिफाइड फाइलों से बाकी बचे हुए बदलावों को हटाने की मांग की।

उन्होंने कहा, “अब 70 साल बीत चुके हैं। यह बात अब वैलिड नहीं रह सकती।” उन्होंने आगे कहा, “मैं इस कमेटी से आग्रह करूंगा कि हमारे पास जो डॉक्यूमेंट्स हैं, उनमें सभी खाली जगहों को भरने की कोशिश करे।”

ओ’नील, जो ‘कैओस’ के लेखक हैं, ने सांसदों से कहा कि उनका मानना ​​है कि पिछली कांग्रेस की जांच में प्रोग्राम का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया था।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कांग्रेस को इस कार्यक्रम की वास्तविक उपलब्धियों के बारे में कभी सच नहीं बताया गया। एजेंसी ने 1977 में कांग्रेस को गुमराह किया था जब उसने एमके-अल्ट्रा को एक असफल कार्यक्रम बताया था।”

उन्होंने गवाही दी कि उनके शोध में मनोचिकित्सक लुई जोल्योन वेस्ट और सिडनी गॉटलिब, जो एमके-अल्ट्रा का नेतृत्व करने वाले सीआईए वैज्ञानिक थे, के बीच पत्राचार का पता चला, जिसमें एलएसडी, सम्मोहन और अनजाने मानव विषयों से जुड़े प्रयोगों पर चर्चा की गई थी।

ओ’नील के अनुसार, उन्हें मिले दस्तावेजों में अनिच्छुक व्यक्तियों से सच्ची जानकारी निकालने और उनमें झूठी जानकारी डालने तथा पहले से वफादार व्यक्तियों के दृष्टिकोण और विश्वासों को बदलने के प्रयासों का वर्णन किया गया है।

सांसदों ने गवाहों से बार-बार उन आरोपों के बारे में सवाल किए कि विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, जेलों और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल सीआईए द्वारा वित्त पोषित संगठनों के माध्यम से गुप्त प्रयोग करने के लिए किया गया था।

ओ’नील ने लेक्सिंगटन एडिक्शन सेंटर, लैकलैंड एयर फोर्स बेस हॉस्पिटल, होम्सबर्ग जेल, वैकाविल जेल और कई विश्वविद्यालयों सहित उन संस्थानों की पहचान की, जो सुनवाई के दौरान चर्चा किए गए शोध से जुड़े थे।

दोनों गवाहों ने पीड़ितों की पहचान करने और अतिरिक्त रिकॉर्ड जारी करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया। ओ’नील ने बताया कि 1977 की सुनवाई के बाद वादा की गई संघीय जांच कभी पूरी तरह से साकार नहीं हुई, जबकि किंजर ने कांग्रेस से शेष गोपनीय फाइलों की जांच करने और पहले से जारी की गई फाइलों से संपादन हटाने का आग्रह किया।

–आईएएनएस

डीकेपी/

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