संयुक्त राष्ट्र, 6 नवंबर (आईएएनएस)। भारत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में चुनाव लड़ने के दौरान शांति स्थापना (पीसकीपिंग) को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही, भारत ने शांति अभियानों को सुदृढ़ करने और शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जताई है।
भारत के मिशन में सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को कहा, “हम शांति स्थापना (पीसकीपिंग) को इस संस्था के मुख्य उद्देश्य के लिए अपरिहार्य मानते हैं। यही कारण है कि भारत ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के लिए इसे एक प्राथमिकता के रूप में चुना है।”
इस कार्यकाल के लिए परिषद के चुनाव अगले साल होंगे।
उन्होंने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना प्रक्रिया और एक ऐसे शांति स्थापना ढांचे के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिसमें बेहतर संसाधन, बेहतर सुरक्षा और जो उस दुनिया का अधिक बेहतर प्रतिनिधित्व करता हो, जिसकी वह सेवा करता है।”
उन्होंने बताया, “भारत ने 50 मिशनों में 3,00,000 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं, जो हमें अब तक का सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता बनाता है।”
सिंह ने महासभा की चौथी समिति में शांति स्थापना अभियानों की व्यापक समीक्षा पर आयोजित वार्षिक बहस के दौरान यह बात कही। यह समिति विशेष राजनीतिक मामलों और उपनिवेशवाद-समाप्ति (डिकोलोनाइजेशन) से जुड़े मुद्दों को देखती है।
उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत पिछली बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष था, तब उसने शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन पर हमला करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई थी।
सिंह ने बताया कि अगस्त 2021 में अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें शांति सैनिकों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी। भारत इस मुद्दे पर अपना नेतृत्व जारी रखेगा।
प्रस्ताव में कहा गया है कि शांति सैनिकों पर लक्षित हमले संयुक्त राष्ट्र के अभियानों के लिए एक “बड़ी चुनौती” हैं। इसमें शांति स्थापना अभियानों की मेजबानी करने वाले सभी देशों से कहा गया है कि वे “संयुक्त राष्ट्र के उन कर्मियों की हत्या और उनके खिलाफ होने वाली हिंसा के सभी कृत्यों के लिए जवाबदेही तय करें, जो शांति स्थापना अभियानों में कार्यरत हैं।”
सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ‘ब्लू हेलमेट’ (शांति सैनिक) “आज असममित और तकनीक-आधारित खतरों का सामना कर रहे हैं और जो लोग शांति सैनिकों पर हमला करते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
सिंह ने कहा कि “जिन देशों के सैनिक और पुलिसकर्मी तैनात हैं, उन्हें परिषद द्वारा तय किए जाने वाले जनादेश को आकार देने में अपनी बात रखने का एक व्यवस्थित मौका मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि जनादेश को लागू करने या उसकी समीक्षा करने से पहले, सैनिक और पुलिस बल देने वाले देशों के साथ विचार-विमर्श के लिए एक संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शांति स्थापना अभियानों के सफल होने की संभावना तब सबसे अधिक होती है, जब एक “व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया हो, जिसका राजनीतिक परिणाम स्पष्ट रूप से तय हो और शांति सैनिकों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तैनाती की मंजूरी देते समय ही क्षमताओं को बढ़ाने और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का इंतजाम कर लिया जाए।”
–आईएएनएस
ओपी/एएस
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