डॉलर के दबदबे को चुनौती : चीनी युआन के बढ़ते प्रभाव ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता, सीनेटरों ने दी चेतावनी

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संयुक्त राष्ट्र, 8 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सीनेटरों के दोनों पार्टियों के एक ग्रुप ने अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा देने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पेश किया है। सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन युआन के आस-पास एक दूसरा ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है। टेड बड और जीन शाहीन के पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि युआन को इंटरनेशनल बनाने की बीजिंग की कोशिश से अमेरिका और उसके साथियों के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है। प्रस्ताव के साथ जारी एक बयान में बड…

संयुक्त राष्ट्र, 8 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सीनेटरों के दोनों पार्टियों के एक ग्रुप ने अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी का दर्जा देने के लिए एक प्रस्ताव फिर से पेश किया है। सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन युआन के आस-पास एक दूसरा ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है।

टेड बड और जीन शाहीन के पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि युआन को इंटरनेशनल बनाने की बीजिंग की कोशिश से अमेरिका और उसके साथियों के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है।

प्रस्ताव के साथ जारी एक बयान में बड ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगातार सहयोग और लगातार सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अमेरिकी डॉलर ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर अपना स्टेटस बनाए रखे।”

उन्होंने कहा, “सालों से, पीआरसी अमेरिका और हमारे साझेदारों की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को टारगेट करते हुए अपना ग्लोबल फाइनेंशियल असर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।”

बड ने चेतावनी दी कि चीन को “ग्लोबल करेंसी फ्लो को बढ़ाने और दूसरा फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की इजाजत देना नीति की विफलता होगी जो दुनिया की अर्थव्यवस्था को विभाजित कर सकता है। इससे फ्री मार्केट की लगातार ग्रोथ को खतरा हो सकता है, खासकर विकासशील देशों में।”

उन्होंने कहा, “अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिरता और खुशहाली लाने वाली भूमिका बनाए रखनी चाहिए।”

शाहीन ने कहा कि डॉलर का दबदबा सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक ताकत और ग्लोबल असर से जुड़ा है।

उन्होंने कहा, “अमेरिकी डॉलर को ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर बनाए रखना न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की लंबे समय की स्थिरता और खुशहाली के लिए जरूरी है, बल्कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।”

शाहीन ने कहा, “चूंकि चीन ग्लोबल करेंसी सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, इसलिए यह सीनेट प्रस्ताव दोनों पार्टियों का संदेश देता है कि अमेरिका को यूएस डॉलर को ग्लोबल रिजर्व करेंसी के तौर पर बनाए रखने को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

उन्होंने हाल की अमेरिकी आर्थिक अस्थिरता की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, “अमेरिका की एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के तौर पर पहचान बेतरतीब टैरिफ रोलआउट और खुद से लगाई गई अस्थिरता से प्रभावित हुई है। ऐसे में यह जरूरी है कि कांग्रेस दिखाए कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में अमेरिका एक अहम हिस्सा बने रहने के लिए तैयार है।”

प्रस्ताव में बताया गया है कि सीनेटरों ने डॉलर के दबदबे को कमजोर करने और विकासशील दुनिया में बीजिंग का असर बढ़ाने के लिए चीन के लंबे समय के कैंपेन के बारे में क्या बताया।

इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के डेटा का जिक्र है, जिससे पता चलता है कि 1999 में ग्लोबल करेंसी रिजर्व में डॉलर का हिस्सा लगभग 71 फीसदी था, लेकिन 2025 की तीसरी तिमाही तक यह घटकर 56.82 फीसदी रह गया। इसी समय के दौरान चीनी युआन का हिस्सा 1.93 फीसदी था।

इस कदम में चीन पर नॉन-मार्केट, फिक्स्ड एक्सचेंज रेट बनाए रखने का भी आरोप लगाया गया है। इससे युआन की कीमत कम रहती है और व्यापार में असंतुलन पैदा होता है।

लॉमेकर्स ने आगे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की ओर इशारा किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इससे विकासशील देशों में चीनी कैपिटल पर निर्भरता बढ़ गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बीजिंग ने 2013 से इस इनिशिएटिव के तहत दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।

सीनेटरों ने डिजिटल करेंसी सिस्टम और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन की कोशिशों पर भी जोर दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि 1,700 से ज्यादा बैंकों ने चीन के क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम या सीआईपीएस को सब्सक्राइब किया है, जिसे वह स्विफ्ट फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम का विकल्प बताता है।

इस उपाय में चेतावनी दी गई है कि ताइवान से जुड़े किसी संकट या हिंद-प्रशांत शिपिंग लेन में रुकावट की स्थिति में चीन की पैरेलल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने की कोशिशों से पश्चिमी देशों का असर कमजोर हो सकता है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका को जरूरी इलाकों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने चाहिए और बीजिंग के फाइनेंशियल असर का मुकाबला करते हुए विकासशील देशों में ग्रोथ और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोगियों के साथ काम करना चाहिए।

–आईएएनएस

केके/एएस

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