एस जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री वेडफुल के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष पर की चर्चा

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नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में जारी पश्चिम एशियाई तनाव पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष बदलते घटनाक्रम के बीच करीबी संपर्क में रहने पर सहमत हुए। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की जानकारी साझा कर लिखा, “कल रात जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पश्चिम एशिया विवाद पर काम की बातचीत हुई। संपर्क में रहने पर सहमत हुए।” यह नई बातचीत हाल के हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच कई…

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में जारी पश्चिम एशियाई तनाव पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष बदलते घटनाक्रम के बीच करीबी संपर्क में रहने पर सहमत हुए।

डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की जानकारी साझा कर लिखा, “कल रात जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पश्चिम एशिया विवाद पर काम की बातचीत हुई। संपर्क में रहने पर सहमत हुए।”

यह नई बातचीत हाल के हफ्तों में दोनों नेताओं के बीच कई डिप्लोमैटिक मुलाकातों के बीच हुई है।

विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने ब्रसेल्स में 16 मार्च को वाडेफुल से खुद मुलाकात की। इस दौरान भी दोनों नेताओं ने “पश्चिम एशिया में विवाद पर विचार साझा” किया और साथ ही दोनों देशों के बीच सहयोग के अलग-अलग पहलुओं की भी समीक्षा की।

इससे पहले, 10 मार्च को, दोनों मंत्रियों ने लगातार बातचीत के हिस्से के तौर पर पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा की थी, जो ऊर्जा सुरक्षा और इलाके की स्थिरता पर विवाद के असर को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दिखाता है।

हाल के हफ्तों में, डॉ. जयशंकर कई ग्लोबल साझेदारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। भारत के विदेश मंत्री ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची समेत कई खास स्टेकहोल्डर्स के साथ भी लगातार संपर्क में बने हुए हैं।

ईरान के अलावा, विदेश मंत्री ने कई खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत जारी रखी है, जिससे इस संकट में शामिल सभी पक्षों के साथ डिप्लोमैटिक रूप से जुड़े रहने की भारत की कोशिशों पर जोर दिया गया है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके नतीजे में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई।

तब से स्थिति और बिगड़ गई है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र के कई देश शामिल हो गए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

इस संकट पर भारत का नजरिया एक सोची-समझी और संतुलित डिप्लोमैटिक स्ट्रैटेजी दिखाता है। भारतीय नेतृत्व 28 फरवरी से सभी क्षेत्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत बनाए हुए है। भारत जिस तरह से इस पूरी स्थिति से निपट रहा है, वह देश के किसी खास पक्ष के साथ जुड़े बिना संकट से निपटने की लगातार कोशिश का संकेत देता है।

–आईएएनएस

केके/एएस

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