अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर ने ट्रंप की टैरिफ नीति का बचाव किया

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वाशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि टैरिफ (आयात शुल्क) और सख्त बातचीत की रणनीति से अब अमेरिकी मजदूरों और उद्योग को वास्तविक फायदे मिलने शुरू हो गए हैं। हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी के सामने पेश होते हुए, ग्रीर ने कहा कि प्रशासन का यह तरीका पिछली नीतियों से बिल्कुल अलग है। उनके हिसाब से, पिछली नीतियों ने ऑफशोरिंग को बढ़ावा दिया था और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को कमजोर किया था। उन्होंने कहा, “हम पहले से ज्यादा सामान निर्यात कर रहे हैं…

वाशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि टैरिफ (आयात शुल्क) और सख्त बातचीत की रणनीति से अब अमेरिकी मजदूरों और उद्योग को वास्तविक फायदे मिलने शुरू हो गए हैं।

हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी के सामने पेश होते हुए, ग्रीर ने कहा कि प्रशासन का यह तरीका पिछली नीतियों से बिल्कुल अलग है। उनके हिसाब से, पिछली नीतियों ने ऑफशोरिंग को बढ़ावा दिया था और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को कमजोर किया था।

उन्होंने कहा, “हम पहले से ज्यादा सामान निर्यात कर रहे हैं और हमारे मजदूर ज्यादा काम कर रहे हैं और उन्हें पहले से ज्यादा वेतन भी मिल रहा है।” उन्होंने रिकॉर्ड स्तर के निर्यात और बढ़ती मजदूरी का हवाला दिया।

ग्रीर ने इस रणनीति को “संतुलित और बराबरी वाला व्यापार” बताया। उनका कहना था कि अमेरिका लंबे समय से दूसरे देशों के सामान को अपने बाजार में आने देता रहा, लेकिन बदले में उसे वैसी ही पहुंच नहीं मिलती थी।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ बराबरी की बात है।” उनका जोर था कि अगर दूसरे देश अमेरिका के बाजार का फायदा लेना चाहते हैं, तो उन्हें भी अमेरिकी उत्पादों को अपने यहां सही तरीके से प्रवेश देना होगा।

इस नीति का एक अहम हिस्सा टैरिफ है। ग्रीर ने कहा कि टैरिफ कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक दबाव बनाने का तरीका है। उन्होंने बताया कि कई देशों में हाल ही में जो बाजार खुले हैं, वहां सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव डालने से संभव हुआ है।

ग्रीर ने शुरुआती आर्थिक फायदों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में इस नीति के लागू होने के बाद से अमेरिका का व्यापार घाटा 24 प्रतिशत कम हुआ है। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी सुधार दिख रहा है।

उनके मुताबिक, उत्पादन बढ़ा है, मजदूरी में बढ़ोतरी हुई है और कामगारों की मांग भी बढ़ी है। उन्होंने कहा, “एक औसत अमेरिकी फैक्ट्री मजदूर अब पहले से ज्यादा उत्पादन कर रहा है और ज्यादा कमा भी रहा है।”

इसके साथ ही, ग्रीर ने यह भी माना कि यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। उन्होंने इस कोशिश को दशकों पुरानी आर्थिक नीतियों को पलटने जैसा बताया। उन्होंने कहा, “50 साल तक ऑफशोरिंग करने के बाद, सिर्फ़ एक साल में यह सब कर पाना मुश्किल है।”

हालांकि ग्रीर ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ रही है, लेकिन कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने बढ़ती उपभोक्ता कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता की ओर इशारा किया।

ग्रीर बताया कि सरकार का फोकस देश के अंदर उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन (आपूर्ति व्यवस्था) को मजबूत करने पर है। उनका कहना था कि टैरिफ का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाला ज्यादा से ज्यादा सामान देश के अंदर ही बने, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका अपने कई व्यापार समझौतों की समीक्षा की तैयारी कर रहा है और कई देशों के साथ बातचीत जारी है। ग्रीर ने संकेत दिया कि आगे भी सरकार सख्ती से नियम लागू करवाने और समझौतों का पालन सुनिश्चित करने पर ध्यान देगी।

पिछले कुछ सालों में अमेरिका की व्यापार नीति में बड़ा बदलाव आया है। अब यह पारंपरिक फ्री ट्रेड (मुक्त व्यापार) से हटकर ज्यादा संरक्षणवादी और सौदेबाजी वाली नीति बन गई है। इसमें घरेलू उत्पादन, मजबूत सप्लाई चेन और अहम क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया जा रहा है।

वाशिंगटन में टैरिफ और वैश्विक व्यापार को लेकर बहस तेज हो रही है। ऐसे में ग्रीर के बयान से साफ है कि सरकार अपनी इस नीति पर कायम रहने वाली है और उसे भरोसा है कि अभी की परेशानियां आगे चलकर बड़े आर्थिक फायदे में बदलेंगी।

–आईएएनएस

एएस/

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