वाशिंगटन, 9 मई (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस में आयोजित ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार शांति और एकता के लिए प्रार्थना की गई। अमेरिका अपनी आजादी के 250वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में इस कार्यक्रम में धार्मिक विविधता की झलक देखने को मिली।
बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) के एक स्वयंसेवक ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और हिंदू परंपरा के अनुसार प्रार्थना की। प्रार्थना शुरू करते हुए स्वयंसेवक ने कहा, “मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि कृपया अपनी आंखें बंद करें और हाथ जोड़ें।”
इसके बाद उन्होंने बार-बार शांति मंत्र का उच्चारण किया। इस प्रार्थना में पूरे संसार में शांति की कामना की गई।
वक्ता ने कहा, “आकाश और अंतरिक्ष में शांति हो। धरती, जल और सभी जीवों में शांति बनी रहे। प्रकृति और पर्यावरण में शांति हो। स्वर्ग की शांति पूरे ब्रह्मांड में फैल जाए।”
उन्होंने लोगों के व्यक्तिगत जीवन के लिए भी शांति की प्रार्थना की और कहा, “हम सभी को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिले।”
अंत में वक्ता ने संस्था की ओर से इस अवसर के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “पूरे बीएपीएस समुदाय, न्यू जर्सी के रॉबिन्सविल स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम और हमारे गुरु, गुरु हरि मोहन स्वामी महाराज की ओर से हम इस अवसर के लिए आपका धन्यवाद करते हैं।”
सोशल मीडिया पर बीएपीएस पब्लिक अफेयर्स ने कहा कि व्हाइट हाउस में आयोजित ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें सम्मान महसूस हुआ। संस्था ने कहा कि ऐसे अवसर हमें याद दिलाते हैं कि आस्था, सेवा और साझा मूल्य समाज को मजबूत बनाते हैं।
इससे पहले ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, “आज हम अमेरिका की प्रार्थना, आस्था और ईश्वर में विश्वास की पुरानी परंपरा का सम्मान करते हैं। जब हम अमेरिका की आजादी के 250 गौरवशाली वर्ष मना रहे हैं, तब हम यह संकल्प लेते हैं कि ईश्वर ने हमारे देश और लोगों को जो अनगिनत आशीर्वाद दिए हैं, उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन सभ्यताओं से लेकर यूरोप के ईसाई साम्राज्यों और अमेरिका की स्थापना तक, पश्चिमी दुनिया का इतिहास ईश्वर के प्रति आस्था से जुड़ा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की आजादी की लड़ाई के दौरान भी यह आस्था साफ दिखाई दी थी। उस समय ‘सेकंड कॉन्टिनेंटल कांग्रेस’ ने स्वतंत्रता की लड़ाई में ईश्वर का आशीर्वाद और सुरक्षा पाने के लिए उपवास, प्रार्थना और आत्मचिंतन का दिन घोषित किया था।
–आईएएनएस
एएस/
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