नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना और सदस्य देशों के बीच परिचालन समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है।
अभ्यास 30 अक्टूबर (शुक्रवार) को शुरू हुआ है और 3 नवंबर 2026 तक चलेगा। यह उन प्रमुख पहलों में से एक है जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल थाईलैंड में आयोजित 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में की थी।
इसमें तीन दिनों का ‘टेबलटॉप एक्सरसाइज’ (सैद्धांतिक अभ्यास) और उसके बाद दो दिनों का ‘हार्बर फेज’ शामिल है, जिसमें बिम्सटेक सदस्य देशों के जहाज हिस्सा ले रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट एक्स में, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “यह अभ्यास बिम्सटेक नेताओं के साझा दृष्टिकोण को कार्य रूप देता है। इससे समुद्री सहयोग मजबूत होगा, परिचालन समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) बेहतर होगी, और बंगाल की खाड़ी में एक सुरक्षित, संरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।”
अंडमान और निकोबार कमांड के अनुसार, बिम्सटेक के पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास का उद्घाटन शुक्रवार को श्री विजय पुरम में अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ, वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी ने किया।
इस समारोह में राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता के साथ-साथ बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए।
अंडमान और निकोबार कमांड ने शनिवार को ‘एक्स’ पोस्ट में कहा: “दिल्ली घोषणापत्र पर आधारित यह अभ्यास, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी साझा प्रतिबद्धताओं को समुद्र में समन्वित कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाना, सूचना साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करना और आतंकवाद सहित समुद्री खतरों व अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के खिलाफ सामूहिक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देना है।”
इस अभ्यास का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र के बारे में जागरूकता (एमडीए) बढ़ाना, बंगाल की खाड़ी में परिचालन समन्वय स्थापित करना, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) कार्यों को बेहतर बनाना, तथा सीमा पार समुद्री अपराधों और तेल या खतरनाक पदार्थों के रिसाव से होने वाले समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता विकसित करना है।
बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं।
पिछले कुछ वर्षों में, बिम्सटेक एक सक्रिय और गतिशील क्षेत्रीय संगठन के रूप में उभरा है। इसके सदस्य देश एक स्वतंत्र, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के साझा दृष्टिकोण को मानते हैं।
–आईएएनएस
केआर/
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