नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से लागू हो गया। अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
अहमदाबाद के निकट सानंद में पहले निर्यात कंसाइनमेंट को रवाना करने के समारोह के दौरान ब्रिटेन के उप उच्चायुक्त स्टीव हिकलिंग ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत राजनीतिक और आर्थिक संबंधों का प्रतीक है तथा इससे दोनों देशों के बीच और भी व्यापक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी की नींव पड़ेगी।
उन्होंने कहा, “यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है और दोनों देशों के बीच पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक आर्थिक साझेदारी की शुरुआत का संकेत देता है।”
स्टीव हिकलिंग ने बताया कि वर्तमान में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आकार लगभग 48 अरब पाउंड प्रति वर्ष है। उनका कहना है कि विभिन्न अध्ययनों के अनुसार इस व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हमारा द्विपक्षीय व्यापार पहले ही करीब 48 अरब पाउंड सालाना है और विश्लेषण बताते हैं कि इस समझौते के बाद इसमें और अधिक बढ़ोतरी होगी।”
समझौते के लागू होने के साथ ही मुंबई के अंधेरी स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईईपीजेड) से ब्रिटेन के लिए रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) की पहली निर्यात खेप को भी रवाना किया गया।
एसईईपीजेड के जोनल डेवलपमेंट कमिश्नर ज्ञानेश्वर पाटिल ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस समझौते पर लगभग एक वर्ष तक बातचीत चली। इसके बाद इसे ब्रिटेन की संसद से मंजूरी मिली और फिर भारत में आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद इसे लागू किया गया।
वहीं एच.के. डिजाइंस (इंडिया) एलएलपी के जनरल मैनेजर (एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट) विश्वनाथ हुबलीकर ने इस व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है और ऐसे समय में यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
उन्होंने कहा कि यूरोप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभर रहा है और भारत-यूके सीईटीए भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
–आईएएनएस
डीबीपी
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