नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारत अगले महीने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। इस दौरान समूह के ‘आउटरीच सेशन’ के लिए गैर-सदस्य देश, बांग्लादेश और नेपाल को भेजे गए निमंत्रण का बड़ा महत्व है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे दक्षिण एशिया में आपसी जुड़ाव और मजबूत होगा।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों की भागीदारी ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ दक्षिण एशिया की सामूहिक भागीदारी को मजबूत कर सकती है। साथ ही एक समृद्ध उपमहाद्वीप के विजन के लिए प्रतिबद्ध इन तीन पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों का एक नया अध्याय खोल सकती है।
यह शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बढ़ते संकट के बीच हो रहा है, जो ‘ग्लोबल अन-ऑर्डर’ (वैश्विक अव्यवस्था) के दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां जबरदस्ती और जवाबी कार्रवाई की लहरें साझा नियमों को कमजोर कर रही हैं।
‘इंडिया नैरेटिव’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यवस्था पर ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली नीति का दबदबा है। ऐसे में शांतिप्रिय उभरती हुई ताकतों पर यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे इसे ‘खून-खराबे और तबाही के एक और भयानक दौर’ से दूर ले जाएं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक शांति और सहयोग की वकालत करने में सबसे आगे रहा है, जो ब्रिक्स के अध्यक्ष के तौर पर उसकी थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ (लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण) में भी झलकता है।
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, “इस मिशन के लिए समर्थन जुटाने में भारत की समझदारी ब्रिक्स आउटरीच सत्र में गैर-सदस्य देश बांग्लादेश और नेपाल को आमंत्रित करने में भी दिखती है। ब्रिक्स की परंपरा रही है कि वह अपने शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय समूहों के अध्यक्षों को आमंत्रित करता है, और बांग्लादेश अभी बिम्सटेक का अध्यक्ष है, जिसका नेपाल भी सदस्य है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम का मकसद ‘ग्लोबल साउथ’ में साझा वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर बहुपक्षीय बातचीत को मजबूत करना है, लेकिन यह भारत और आमंत्रित देशों को उथल-पुथल के बाद के दौर में द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से शुरू करने का मौका भी देता है, जिससे देशों और पूरे उपमहाद्वीप को फायदा हो सके।
‘इंडिया नैरेटिव’ ने उल्लेख किया, “उथल-पुथल के बाद नेपाल और बांग्लादेश दोनों ही भारत के लिए एक अलग स्थिति पेश करते हैं। नेपाल ने एक ऐसी राजनीतिक पार्टी को सत्ता सौंपी है जो सिर्फ पांच साल पुरानी है और जिसके नेता (प्रधानमंत्री) नए हैं, जबकि बांग्लादेश ने ऐसी पार्टी को चुना है जिसके साथ भारत के संबंध ऐतिहासिक रूप से ठंडे रहे हैं। हालांकि, भारत संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए इस धुंध को पार करने को लेकर दृढ़ है, लेकिन मौजूदा हालात में यह कहना आसान है, करना मुश्किल।”
रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी अटकलें हैं कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर नई दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री को औपचारिक रूप से आमंत्रित करने के लिए नेपाल का दौरा कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, “इस समिट के लिए नेपाल को मिला न्योता हिमालयी देश को ‘ग्लोबल साउथ’ पहल के साथ और बेहतर ढंग से जुड़ने में मदद करेगा। साथ ही, नई दिल्ली और बीजिंग के एक ही मंच पर होने से इसकी पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को भी बढ़ावा मिलेगा।”
दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव की स्थिति पर जोर देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘ग्लोबल साउथ’ मिशन को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ, उन्हें अपने संबंधों को सावधानी और समझदारी से संभालने की साझा जिम्मेदारी निभानी होगी।
–आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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