संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को देना कभी भी कोई विकल्प नहीं था : ईरान

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तेहरान, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को हस्तांतरित नहीं करेगा और इसे अमेरिका भेजने पर कभी विचार भी नहीं किया गया था। सरकारी आईआरआईबी टीवी चैनल पर बात करते हुए बघाई ने बताया कि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के हाल के बयान, 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम के दायरे में दिए गए थे। उनका मतलब किसी नई बातचीत या रिश्तों में सुधार का संकेत देना नहीं था। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को…

तेहरान, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को हस्तांतरित नहीं करेगा और इसे अमेरिका भेजने पर कभी विचार भी नहीं किया गया था।

सरकारी आईआरआईबी टीवी चैनल पर बात करते हुए बघाई ने बताया कि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के हाल के बयान, 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम के दायरे में दिए गए थे। उनका मतलब किसी नई बातचीत या रिश्तों में सुधार का संकेत देना नहीं था।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को अराघची ने कहा था कि मौजूदा युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा।

बघाई ने साफ किया कि विदेश मंत्री के बयान का मतलब यह था कि लेबनान में युद्धविराम होने के बाद, तेहरान ने वाशिंगटन के साथ हुए समझौते के तहत जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था लागू की है।

उन्होंने कहा, “कोई नया समझौता नहीं हुआ है। वही समझौता लागू है जो 8 अप्रैल को घोषित किया गया था।”

बघाई ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने शुरू से ही इस समझौते का पालन नहीं किया, खासकर लेबनान पर भी इसे लागू करने के वादे को पूरा नहीं किया। हालांकि अमेरिका और इजरायल ने इस बात से इनकार किया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान जवाबी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है और पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे मध्यस्थता के प्रयास संघर्ष को समाप्त करने और ईरान के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित हैं।

ईरान ने 28 फरवरी से इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी थी। उसने इजराइल और अमेरिका से जुड़े जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया था, क्योंकि दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे।

इसके जवाब में अमेरिका ने भी नाकाबंदी कर दी और ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोक दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता असफल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर इस हफ्ते पाकिस्तान में होने की उम्मीद है, जो संभवतः रविवार को हो सकता है।

–आईएएनएस

एएस/

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