चांद के साउथ पोल पर लूनर ड्रोन और रोबोटिक रोवर भेजेगा नासा, जानें कब लॉन्च होगा ‘मूनफॉल ड्रोन मिशन’

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वॉशिंगटन, 27 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने चांद पर इंसानों की लंबे समय तक लगातार मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ऑटोनॉमस लूनर ड्रोन, रोबोटिक रोवर और मजबूत कम्युनिकेशन नेटवर्क तैनात करने की विस्तृत योजनाओं के बारे में जानकारी दी है। नासा मुख्यालय में मून बेस कार्यक्रम की ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अब सिर्फ चांद पर उतरने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि वहां स्थायी ऑपरेशनल फॉर्मेट तैयार किया जाएगा। यह भविष्य के आर्टेमिस मिशन्स, वैज्ञानिक खोज और मंगल ग्रह अभियान के लिए आधार…

वॉशिंगटन, 27 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने चांद पर इंसानों की लंबे समय तक लगातार मौजूदगी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ऑटोनॉमस लूनर ड्रोन, रोबोटिक रोवर और मजबूत कम्युनिकेशन नेटवर्क तैनात करने की विस्तृत योजनाओं के बारे में जानकारी दी है।

नासा मुख्यालय में मून बेस कार्यक्रम की ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अब सिर्फ चांद पर उतरने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि वहां स्थायी ऑपरेशनल फॉर्मेट तैयार किया जाएगा। यह भविष्य के आर्टेमिस मिशन्स, वैज्ञानिक खोज और मंगल ग्रह अभियान के लिए आधार बनेगा।

इस रणनीति का प्रमुख हिस्सा मूनफॉल ड्रोन मिशन है। यह ड्रोन चांद के रहस्यमयी इलाकों के बारे में पता लगाने, पानी की बर्फ की खोज करेगा और भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षित लैंडिंग साइट तैयार करेगा। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) इन ड्रोन्स का निर्माण कर रही है, जबकि फायरफ्लाई एयरोस्पेस को कैरियर यान बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। इस मिशन को साल 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य है।

ये ड्रोन चांद की सतह पर धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे। खासतौर पर दक्षिणी ध्रुव के उन गहरे क्रेटर्स की खोज करेंगे जहां सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती। ड्रोन हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेंगे, सेंटीमीटर स्तर की सटीकता से नक्शा बनाएंगे और चांद के अत्यधिक ठंडे तापमान में काम करने वाली नई तकनीकों का परीक्षण करेंगे।

मून बेस प्रोग्राम के एग्जीक्यूटिव कार्लोस गार्सिया गोलान ने बताया, “ये ड्रोन हमें चांद के गहरे इलाकों की पड़ताल करने और वहां की वास्तविक स्थिति जानने में मदद करेंगे।”

नासा के अनुसार, भविष्य का मून बेस किसी छोटे स्टेशन जैसा नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्ग मील में फैले शहर जैसा होगा। रहने की जगहें ऊंची चोटियों पर बनाई जाएंगी जहां सूरज की रोशनी मिल सके, जबकि न्यूक्लियर पावर सिस्टम सुरक्षा कारणों से कई किलोमीटर दूर रखे जाएंगे।

मेन आर्किटेक्ट नुजोद मेरेंसी ने बताया, “जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ेगा, यह धीरे-धीरे एक फैले हुए शहर जैसा रूप ले लेगा।”

एजेंसी चांद के चारों ओर एक मजबूत संचार और नेविगेशन नेटवर्क भी विकसित कर रही है। इसमें सैटेलाइट्स का समूह शामिल होगा जो रोबोटिक और मानव अभियानों को निरंतर सहायता प्रदान करेगा।

नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजकमैन ने इसे स्पेस एक्सप्लोरेशन में बड़े बदलाव का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नासा पूर्ण दक्षता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ ऐसे मिशन कर रहा है।

–आईएएनएस

एमटी/पीएम

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