पाकिस्तान: मानवाधिकार संगठनों ने बलूचिस्तान और केपी की गिरती सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

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इस्लामाबाद, 17 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन (एचआरसीपी) ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने कहा कि इन क्षेत्रों में लोग जबरन गुमशुदगी, टार्गेट किलिंग और उग्रवादी हमलों के बीच फंसते जा रहे हैं। एचआरसीपी ने एक्स पर जारी बयान में कहा, “ग्वादर विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर, प्रो-वाइस-चांसलर और दो अन्य कर्मचारियों के ग्वादर से क्वेटा जाते समय मस्तुंग में कथित अपहरण ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।” आयोग ने पूछा कि सरकार प्रमुख राजमार्गों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में क्यों विफल…

इस्लामाबाद, 17 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन (एचआरसीपी) ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने कहा कि इन क्षेत्रों में लोग जबरन गुमशुदगी, टार्गेट किलिंग और उग्रवादी हमलों के बीच फंसते जा रहे हैं।

एचआरसीपी ने एक्स पर जारी बयान में कहा, “ग्वादर विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर, प्रो-वाइस-चांसलर और दो अन्य कर्मचारियों के ग्वादर से क्वेटा जाते समय मस्तुंग में कथित अपहरण ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।”

आयोग ने पूछा कि सरकार प्रमुख राजमार्गों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में क्यों विफल हो रही है।

आयोग ने घमख्वार हयात की नुशकी में हत्या पर भी चिंता जताई। एचआरसीपी ने कहा कि जब शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का अपहरण या हत्या होती है, तो इसका असर केवल व्यक्तिगत त्रासदी तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।

बयान में कहा गया, ” बन्नू, बजौर और लक्की मरवत में हालिया घातक हमले उग्रवादी हिंसा के बढ़ते खतरे को दर्शाते हैं। सराय नौरंग के भीड़भाड़ वाले बाजार में बम विस्फोट समेत इन हमलों में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के जवानों की जान गई।”

एचआरसीपी ने सरकार से केवल निंदा करने तक सीमित न रहने और नागरिकों तथा सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। आयोग ने अपहृत विश्वविद्यालय अधिकारियों की सुरक्षित बरामदगी, सभी हमलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस बीच, बलोच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने दावा किया कि प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार और शिक्षक गमख्वार हयात की नुशकी जिले के किली मेंगल इलाके में पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड से जुड़े लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

नसीम बलोच ने कहा कि गमख्वार हयात की हत्या कोई अलग घटना नहीं बल्कि बलूचिस्तान में जारी “बलूच जनसंहार” और सामूहिक दमन का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुद्धिजीवियों और जागरूक आवाजों को निशाना बनाकर बलूच राष्ट्र की बौद्धिक और सांस्कृतिक नींव को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

–आईएएनएस

केआर/

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