वाशिंगटन, 30 जून (आईएएनएस)। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ आई. जस्टर ने कहा कि लोगों के बीच संबंध, डिप्लोमैटिक उतार-चढ़ाव के दौर में भारत और अमेरिका को जोड़ने वाली कड़ी रहा है। उन्होंने भारत में शुरुआती अमेरिकी कॉन्सुलेट से लेकर आज की बड़ी वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक के संबंधों के विकास का पता लगाया।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में जस्टर ने कहा कि आधुनिक रणनीतिक साझेदारी बनने से बहुत पहले, भारत और अमेरिका सदियों से कई अहम तरीकों से जुड़े हुए थे।
जस्टर ने कहा, “भौगोलिक तौर पर इतने दूर कोई भी दो देश अमेरिका और भारत जितने करीब से नहीं जुड़े हुए हैं।”
जस्टर ने बताया कि अमेरिका ने पेरिस में अपना मिशन खोलने के कुछ ही साल बाद, भारत में अपने दो सबसे शुरुआती विदेशी डिप्लोमैटिक मिशन शुरू किए थे, 1792 में कलकत्ता में और 1794 में मद्रास में।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने भारत की आजादी के लिए ब्रिटेन पर दबाव डाला था और अमेरिका ने भारत की अंतरिम सरकार के साथ सितंबर 1946 में संबंध बनाए थे, जो भारत के औपचारिक रूप से आजाद होने से 11 महीने से भी ज्यादा समय पहले था।
जस्टर ने कहा कि शीत युद्ध के बाद के संबंधों में भारत के 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद तेजी आई, लेकिन भारत के 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद उन्हें झटका लगा। इसके बाद अमेरिका के उपविदेश सचिव स्ट्रोब टैलबोट और भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बीच हुई बातचीत ने संबंधों को वापस पटरी पर लाने में मदद की और तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के 2000 के भारत दौरे का रास्ता बनाया।
उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने तब दुनिया के सबसे पुराने और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच संबंधों को बदलने की कोशिश की, जिसमें हाई टेक्नोलॉजी और सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट उस बदलाव का केंद्र बन गए।
जस्टर ने कहा कि एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने उस नींव पर काम करना जारी रखा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय भारत को एक बड़ा रक्षा साझेदार बनाने, पहले ट्रंप सरकार के दौरान 2+2 मंत्रीस्तरीय डायलॉग शुरू करने और मंत्री स्तर पर क्वाड को फिर से शुरू करने और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय क्वाड मीटिंग्स को नेताओं के स्तर तक बढ़ाने का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि दूसरे ट्रंप सरकार ने भारत के साथ रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर काम करना जारी रखा, साथ ही पहली बार द्विपक्षीय व्यापार समझौता करने की कोशिश की।
पूर्व अमेरिकी जस्टर ने कहा कि 2001 में जब वे वाणिज्य विभाग के अवरसचिव थे, तब सामान और सर्विस का आपसी व्यापार 19 बिलियन डॉलर था, जो आज बढ़कर लगभग 250 बिलियन डॉलर हो गया है। दोनों देश इस दशक के आखिर तक इसे 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक व्यापाार समझौता पूरा होने से इसमें काफी आसानी होगी। भारत-अमेरिका साझेदारी इंसानी कोशिशों के लगभग हर क्षेत्र में फैल गई है, जिसमें रक्षा, नॉन-प्रोलिफरेशन, काउंटर-टेररिज्म, व्यापार, निवेश, विज्ञान और तकनीक, स्वास्थ्य सुविधा, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, अंतरिक्ष और समुद्र शामिल हैं।”
जस्टर ने कहा, “हमारे लोगों के बीच का संबंध खास तौर पर जरूरी रहा है। कई तरह से, यह वह सीक्रेट है जो हमें एक साथ बांधे रखता है, जिसमें सरकारी संबंधों में उतार-चढ़ाव के अलग-अलग दौर भी शामिल हैं।”
उन्होंने 2019 में ह्यूस्टन में हुए “हाउडी मोदी” इवेंट और 2020 में अहमदाबाद में हुए “नमस्ते ट्रंप” इवेंट को पब्लिक गुडविल के उदाहरण के तौर पर बताया और कहा कि 5 मिलियन से ज्यादा भारतीय अमेरिकियों का अमेरिकी अर्थव्यवस्था और समाज पर बहुत ज्यादा प्रभाव था।
पूर्व राजदूत ने साझेदारी को बढ़ावा देने में मदद के लिए यूएसआईएसपीएफ और उसकी लीडरशिप की भी सराहना की और कहा कि संगठन और उसके बिजनेस लीडर्स इस संबंध में अहम रहे हैं।
–आईएएनएस
केके/पीएम
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