बुखारेस्ट, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान ने शुक्रवार को बुखारेस्ट के विक्टोरिया पैलेस में एक बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कई खास क्षेत्रों में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में बताया गया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और नई तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और दूसरे अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुखारेस्ट के विक्टोरिया पैलेस में रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान के साथ भारत-रोमानिया द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा की।”
इससे पहले, राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मु रोमानिया के राजकीय दौरे पर हैं; यह तीन दशकों के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का रोमानिया का पहला दौरा है। कंज्यूमर अफेयर्स, फूड और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया, सांसद दिनेश शर्मा और विजय बघेल भी इस दौरे पर राष्ट्रपति के साथ हैं।
भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम में राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप के प्रमुख संपर्क बिंदु पर स्थित रोमानिया, अपनी रणनीतिक स्थिति, अत्यन्त कुशल मानव संसाधन, उन्नत औद्योगिक क्षमता और यूरोपीय संघ के साथ सुदृढ़ एकीकरण के कारण भारत का एक स्वाभाविक और महत्त्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। रोमानिया न केवल निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, बल्कि यह वृहत्तर यूरोपीय बाजार का प्रवेश द्वार भी है।
उन्होंने कहा कि इस मंच में बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी, रोमानिया में विद्यमान अवसरों के प्रति भारतीय उद्योगों के बढ़ते विश्वास और रोमानियाई व्यवसायों के साथ स्थायी साझेदारी बनाने की उनकी इच्छा को व्यक्त करती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग भारत और यूरोपीय संघ की समकालीन साझेदारी का प्रमुख आधार हैं। लगभग दो अरब लोगों के संयुक्त बाजार और लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था के साथ, भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक है। इसका उद्देश्य व्यापारिक एकीकरण को और गहरा करना, निवेश के प्रवाह में तेजी लाना तथा सशक्त एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एफटीए का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा। इससे कारोबार के लिए विश्वसनीय परिवेश तैयार होगा, मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण मजबूत होगा तथा दोनों पक्षों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
–आईएएनएस
केके/पीएम
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