नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। भारत ने सोमवार को पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते हमलों पर गहरा खेद जताया और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। साथ ही विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय है।
मंत्रालय के बयान में कहा गया, “भारत पश्चिम एशिया में फिर से हुए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करता है। ये घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं। यह संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक समय से जारी है और इससे भारी मानवीय पीड़ा हुई है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।”
बयान में आगे कहा गया, “हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे तुरंत तनाव कम करें, यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को कोई नुकसान न हो, और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही वार्ताओं को पूरा करें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट सके।”
इससे पहले, भारत के तेहरान स्थित दूतावास ने भी क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों से उपलब्ध सभी साधनों के माध्यम से देश छोड़ने की सलाह दी।
इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने सोमवार को कहा कि उसने ईरान के महशहर क्षेत्र में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर “कई लक्ष्यों” को निशाना बनाया है।
एक अन्य बयान में इजरायली सेना ने दावा किया कि सोमवार सुबह दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को रोक दिया गया।
आईडीएफ ने यह भी कहा कि वेस्ट बैंक में खुले क्षेत्र में जो प्रभाव देखा गया, वह संभवतः इंटरसेप्शन के बाद गिरे बड़े मलबे के कारण था। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, यरुशलम क्षेत्र में मिसाइल हमले की चेतावनी के बाद अलर्ट वापस ले लिया गया।
इस बीच, ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिण स्थित दहियाह क्षेत्र में हमले बढ़ाता है, तो उसे और भी “विनाशकारी हमलों” का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए वो “पछता सकता है।”
उन्होंने कहा कि इजरायल, लेबनान के लोगों के खिलाफ “शत्रुतापूर्ण कार्रवाई” कर रहा है और अमेरिका के समर्थन तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चुप्पी के कारण युद्ध अपराध कर रहा है, जिसमें फॉस्फोरस बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि चेतावनियों के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान और दहियाह पर हमले बढ़ा दिए हैं और सभी सीमाओं को पार कर दिया है।
28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमलों के बाद ये संघर्ष शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले कर इजरायल और अमेरिकी ठिकानों तथा क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया।
बाद में 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन इसके बाद शांति वार्ताएं विफल रहीं। हालांकि हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की कोशिश चल रही है।
–आईएएनएस
केआर/
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