नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शनिवार को कहा कि नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों की मजबूत भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पर वैश्विक भरोसा बढ़ा है। मंत्रालय ने कहा कि यह ब्रिक्स के बढ़ते महत्व, विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के साथ उसके विस्तारित जुड़ाव को भी दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यह शिखर सम्मेलन पिछले आठ महीनों से जारी व्यापक तैयारियों का परिणाम है, जिसकी शुरुआत जनवरी में भारत द्वारा ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ हुई थी।
उन्होंने बताया कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया। इनमें मंत्रिस्तरीय बैठकें, कार्य समूहों की बैठकें, व्यापारिक सत्र, जन-केंद्रित गतिविधियां और विभिन्न विषयगत पहल शामिल रहीं।
शनिवार को ब्रिक्स नेताओं का पहला सत्र ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित हुआ। दलेला ने कहा कि सभी नेताओं ने अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखे, लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति रही कि वैश्विक शासन संस्थानों को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी, प्रभावी और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और विकासशील देशों तथा ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता दोहराई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार कर विकासशील देशों की आवाज को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
दलेला ने कहा कि चर्चा में ब्रिक्स सहयोग के मूल सिद्धांतों- आपसी सम्मान, समानता, एकजुटता, खुलापन, समावेशिता और सहमति की फिर से पुष्टि हुई। नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों का समाधान संवाद और परामर्श के जरिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नेताओं ने दुनिया में जारी संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों पर भी चर्चा की तथा संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर जोर दिया।
दलेला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स को व्यावहारिक सहयोग और विकासोन्मुख परिणामों पर केंद्रित रहना चाहिए, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सहयोग के लिए चार नई पहल भी प्रस्तावित कीं। इनमें ब्रिक्स ट्रोइका तंत्र, वैश्विक शासन सुधार के लिए ब्रिक्स रोडमैप, संकटग्रस्त नाविकों की सहायता के लिए सीफेयरर इमरजेंसी सपोर्ट इनिशिएटिव नेटवर्क और ग्लोबल साउथ के अधिकारियों एवं युवा पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए ग्लोबल साउथ नेगोशिएशन सपोर्ट पहल शामिल हैं।
दलेला ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा-2026 का सर्वसम्मति से अपनाया जाना भारत की अध्यक्षता की बड़ी उपलब्धि है और यह दर्शाता है कि ब्रिक्स देश वैश्विक महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सक्षम हैं।
उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स की चार प्राथमिकताओं- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के तहत 50 से अधिक व्यावहारिक परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों को भारत इनोवेट प्रदर्शनी का दौरा कराया गया, जिसमें भारत की नवाचार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और विकास संबंधी उपलब्धियों और संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।
ब्रीफिंग के अंत में दलेला ने कहा कि किसी भी अध्यक्षता की सफलता केवल बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि भागीदारी की गुणवत्ता, सहमति बनाने की क्षमता और ठोस परिणामों से आंकी जाती है। भारत नई दिल्ली घोषणा और शिखर सम्मेलन के सभी निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
–आईएएनएस
डीएससी
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