सोल, 8 जून (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में मतपत्रों की कमी बड़ा मुद्दा बनी। इसे लेकर अब सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे ने संसदीय जांच की मांग करते हुए अलग-अलग प्रस्ताव दाखिल किए हैं। दोनों दलों ने घटना की विस्तृत जांच की मांग की, लेकिन जांच के दायरे को लेकर उनके बीच मतभेद हैं।
सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी (डीपी) और मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी (पीपीपी) ने नेशनल असेंबली के बिल्स विभाग में अपने-अपने अनुरोध अलग-अलग दाखिल किए, हालांकि दोनों ने कहा कि वे आगे बातचीत कर जांच के विवरण पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, पीपीपी ने 18 सदस्यीय विशेष समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो 60 दिनों तक जांच की निगरानी करेगी। इसमें दोनों दलों से नौ-नौ सदस्य होंगे और समिति की अध्यक्षता पीपीपी का एक सदस्य करेगा।
पीपीपी के प्रस्ताव के अनुसार, यह समिति मतपत्रों की कमी के कारणों, मतदाताओं के अधिकारों के उल्लंघन और मतदान केंद्र से बैलेट बॉक्स हटाने के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई की भी जांच करेगी।
इसके अलावा, पार्टी ने इस मामले में स्वतंत्र अभियोजन जांच के लिए एक अलग विधेयक लाने की भी योजना बनाई है।
सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपना अलग प्रस्ताव बाद में प्रस्तुत किया।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चेओन जून-हो ने कहा, “राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (एनईसी) ने पहले से मतपत्रों की कमी की संभावना जताई थी। इसके बावजूद समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे गंभीर अव्यवस्था पैदा हुई।”
उन्होंने कहा कि इस “गंभीर कुप्रबंधन” ने चुनाव की निष्पक्षता पर अनावश्यक संदेह को जन्म दिया।
उन्होंने आगे कहा कि संसदीय जांच का उद्देश्य निर्वाचन आयोग की संरचनात्मक समस्याओं, सभी स्तरों पर चुनाव आयोगों की कमियों की जांच करना और सुधार उपाय सुझाना होगा, ताकि मतदान अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हों और जनता का भरोसा बहाल किया जा सके।
दोनों दलों के बीच जांच के दायरे पर बातचीत जारी रहने की संभावना है, जिसके बाद इस प्रस्ताव को पूर्ण सदन में मतदान के लिए रखा जाएगा।
चुनाव के दौरान सियोल के एक दर्जन से अधिक मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी की सूचना मिली थी, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई और सियोल के सोंगपा वार्ड के एक मतदान केंद्र पर चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया और शुक्रवार को मतपेटियों को मतगणना के लिए स्थानांतरित किया गया, जो मतदान के दो दिन बाद हुआ।
–आईएएनएस
केआर/
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