सोल, 25 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह स्पष्ट किया। यह बयान दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच हालिया फोन वार्ता के आधिकारिक विवरण में ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ शब्द के स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किए जाने के बाद आया है।
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय ने सोमवार को विदेश मंत्री चो ह्यून और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई फोन पर बातचीत का विवरण जारी किया था। इसमें उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे के समाधान का उल्लेख किया गया, लेकिन ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ शब्द का सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं किया गया था।
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बातचीत के अलग विवरण में भी उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे या परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने केवल इतना कहा कि रूबियो ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को उन मुद्दों पर करीबी समन्वय बनाए रखना चाहिए, जो दोनों देशों के गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क दो-सुन ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि सोल और वाशिंगटन ने लगातार कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, स्थिरता और परमाणु निरस्त्रीकरण को अपना लक्ष्य बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल नवंबर में दक्षिण कोरिया-अमेरिका शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त व्याख्यात्मक सामग्री में भी इन लक्ष्यों को स्पष्ट किया गया था।
पार्क ने कहा कि दोनों देश इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए समन्वय के साथ उत्तर कोरिया से संबंधित नीतियों पर काम कर रहे हैं और विदेश मंत्रियों के बीच हालिया फोन वार्ता में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ दोबारा संपर्क स्थापित करने के प्रयासों के बीच वाशिंगटन की नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें इस साल के अंत में किम से फिर मुलाकात की उम्मीद है। हालांकि, पिछले सप्ताह उन्होंने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया था कि किम के साथ दोबारा बातचीत की कोशिश में उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण अब भी उनका लक्ष्य है या नहीं।
इसी बीच, पिछले सप्ताह ट्रंप के निर्देश पर दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास भी सीमित कर दिए। इसे उत्तर कोरिया के प्रति तनाव कम करने और बातचीत का माहौल बनाने की दिशा में एक नरम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
–आईएएनएस
केआर/
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