वॉशिंगटन, 29 मई (आईएएनएस)। यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की नीति की आलोचना के बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल क्षेत्र पर किसी भी पूर्व अमेरिकी प्रशासन की तुलना में अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि प्रशासन ने रूस की ऊर्जा इंडस्ट्री के खिलाफ अभूतपूर्व कदम उठाए हैं, जिनमें देश की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध भी शामिल हैं।
कीव पर हालिया रूसी हमलों के बाद क्या वॉशिंगटन रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, इस सवाल पर बेसेंट ने मौजूदा प्रशासन की तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार से की।
उन्होंने कहा, “बाइडेन प्रशासन ने बहुत हल्के प्रतिबंध लगाए थे, क्योंकि उन्हें चुनाव के दौरान पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की चिंता थी।” बेसेंट ने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन से पहले प्रतिबंध व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया था और बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे और विस्तारित किया गया।
उन्होंने कहा, “अक्टूबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों-लुकोइल और रोजनेफ्ट पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था और हमने ऐसा किया।”
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब वॉशिंगटन और यूरोप में यह बहस फिर तेज हो गई है कि यूक्रेन युद्ध जारी रहने के बीच मॉस्को पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाना चाहिए या नहीं। हालांकि बेसेंट ने किसी नए प्रतिबंध की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान से संकेत मिला कि ट्रंप प्रशासन मानता है कि उसके मौजूदा कदम कई सहयोगी देशों की तुलना में अधिक कठोर हैं।
अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस पर कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का निशाना बैंक, ऊर्जा कंपनियां, रक्षा उद्योग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी रहे हैं। हालांकि इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को लेकर नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के बीच अब भी बहस जारी है।
दरअसल अमेरिका में ट्रंप प्रशासन पर रूस के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं। ट्रंप प्रशासन यह दिखाना चाहता है कि वह रूस के खिलाफ कमजोर नहीं बल्कि सख्त रुख अपनाए हुए है। रूस की जिन कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं, उन्हें रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाता है। इन पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली आय को कम करना है, क्योंकि युद्ध के लिए रूस काफी हद तक ऊर्जा निर्यात से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर करता है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों का रूस पर कितना असर पड़ता है, इस पर भी दो राय है।
ट्रंप प्रशासन के विपरीत आलोचकों का कहना है कि रूस ने चीन और भारत जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर काफी नुकसान की भरपाई कर ली है। तेल और गैस की वैश्विक मांग बनी रहने से रूस को अभी पर्याप्त आय मिल रही है। अमेरिका ने रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
–आईएएनएस
एवाई/वीसी
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