वॉशिंगटन, 28 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों का टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां होमलैंड सिक्योरिटी सचिव मार्कवेन मुलिन ने इस फैसले का समर्थन किया, वहीं ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन ने इसे “गलत फैसला” करार दिया।
रविवार को अलग-अलग टीवी कार्यक्रमों में बातचीत के दौरान मार्कवेन मुलिन ने कहा कि टीपीएस कभी भी स्थायी व्यवस्था नहीं थी और इसका उद्देश्य केवल सीमित समय के लिए सुरक्षा प्रदान करना था।
उन्होंने कहा, “टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस का मकसद कभी स्थायी नहीं था। लाभार्थियों के पास कई विकल्प हैं। वे स्थायी निवास या अस्थायी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं या फिर अपने देश लौट सकते हैं। यदि वे वापस जाना चाहते हैं तो सरकार उनकी मदद करेगी।”
मुलिन ने कहा कि स्वदेश लौटने वाले प्रवासियों को सरकार हवाई टिकट के साथ लगभग 2,100 डॉलर की आर्थिक सहायता भी देगी, ताकि वे अपने देश में दोबारा जीवन शुरू कर सकें।
यह बयान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें कानूनी चुनौतियां जारी रहने के बावजूद ट्रंप प्रशासन को हैती और सीरिया के 3.5 लाख से अधिक प्रवासियों का टीपीएस समाप्त करने की अनुमति दी गई।
हैती की सुरक्षा स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुलिन ने कहा कि सरकार निर्वासन से जुड़े फैसले कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लेती है।
उन्होंने कहा, “दुनिया में अमेरिका से अधिक उदार देश कोई नहीं है, लेकिन हम नहीं चाहते कि लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाएं।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग की यात्रा संबंधी चेतावनियां जरूरी नहीं कि हैती लौटने वाले नागरिकों की परिस्थितियों को भी उसी तरह दर्शाती हों।
मुलिन ने कहा कि प्रशासन को उम्मीद है कि हैती लौटने वाली उड़ानें लगभग पूरी तरह भरकर जाएंगी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हैती और सीरिया जैसे देशों का पुनर्निर्माण करना है तो वहां के सक्षम नागरिकों को अपने देश लौटकर योगदान देना होगा।
हालांकि, इसी कार्यक्रम में ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन ने ट्रंप प्रशासन की नीति का खुलकर विरोध किया।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह कई कारणों से गलत फैसला है। हैती बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। जो भी लंबे समय से वहां की स्थिति को देख रहा है, वह जानता है कि हालात पहले से कहीं ज्यादा खराब हो चुके हैं।”
डिवाइन ने कहा कि हैती के नागरिकों को वापस भेजने से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, “जो लोग रोज काम कर रहे हैं, अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, घर खरीद रहे हैं, पुराने मकानों की मरम्मत कर रहे हैं, कारोबार शुरू कर रहे हैं और इस देश में अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं, उन्हें जबरन निकालना अमेरिका और विशेष रूप से ओहायो के हित में नहीं है।”
उन्होंने बताया कि हैती के प्रवासी अमेरिका में विनिर्माण, खाद्य उत्पादन, स्वास्थ्य सेवाओं और नर्सिंग होम जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की।
गौरतलब है कि टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) कार्यक्रम की शुरुआत अमेरिकी कांग्रेस ने वर्ष 1990 में की थी। इसके तहत युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित देशों के नागरिकों को सीमित अवधि के लिए अमेरिका में रहने और काम करने की कानूनी अनुमति दी जाती है।
हैती लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, गिरोहों की हिंसा और प्राकृतिक आपदाओं के कारण टीपीएस सूची में शामिल है, जबकि सीरिया में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद वहां के नागरिकों को भी इस कार्यक्रम का लाभ मिलता रहा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि टीपीएस को कभी भी स्थायी निवास का माध्यम बनाने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था और अस्थायी संरक्षण को स्थायी आव्रजन दर्जे में नहीं बदला जाना चाहिए।
–आईएएनएस
डीएससी
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