अमेरिका के सीनेट बिल में यूक्रेन को इंटेलिजेंस सपोर्ट और भारत समेत साझेदार देशों से सहयोग बढ़ाने पर जोर

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वॉशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सीनेट की एक अहम इंटेलिजेंस समिति ने एक व्यापक इंटेलिजेंस ऑथराइजेशन बिल को आगे बढ़ाया है। इस बिल में यूक्रेन को अमेरिकी इंटेलिजेंस सहायता जारी रखने, भारत सहित इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के साथ सहयोग को गहरा करने और चीन व रूस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निर्यात पर निगरानी को और सख्त करने के प्रावधान शामिल हैं। सीनेट की सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस ने गुरुवार को फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इंटेलिजेंस ऑथराइजेशन एक्ट (आईएए) को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी। कोलोराडो के डेमोक्रेटिक सीनेटर माइकल बेनेट ने कहा क‍ि…

वॉशिंगटन, 22 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सीनेट की एक अहम इंटेलिजेंस समिति ने एक व्यापक इंटेलिजेंस ऑथराइजेशन बिल को आगे बढ़ाया है। इस बिल में यूक्रेन को अमेरिकी इंटेलिजेंस सहायता जारी रखने, भारत सहित इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के साथ सहयोग को गहरा करने और चीन व रूस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के निर्यात पर निगरानी को और सख्त करने के प्रावधान शामिल हैं।

सीनेट की सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस ने गुरुवार को फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इंटेलिजेंस ऑथराइजेशन एक्ट (आईएए) को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी।

कोलोराडो के डेमोक्रेटिक सीनेटर माइकल बेनेट ने कहा क‍ि मैं लगातार उन संसाधनों और अधिकारों के लिए लड़ रहा हूं, जिनकी हमारे खुफिया कर्मियों को जरूरत है। इनमें हजारों कोलोराडो के लोग भी शामिल हैं, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह कानून यह सुनिश्चित करेगा कि खुफिया एजेंसियां अपना ‘महत्वपूर्ण काम जारी रख सकें, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ है।’

बेनेट ने यूक्रेन के लिए अमेरिकी खुफिया समर्थन जारी रखने से जुड़े प्रावधानों पर दोनों पार्टियों के बीच मिलेजुले समर्थन की भी बात की।

इस बिल में यह जरूरी किया गया है कि अमेरिकी खुफिया समुदाय यूक्रेन में चल रहे युद्ध के दौरान ‘महत्वपूर्ण खुफिया सहायता जारी रखे’ और अगर भविष्य में कोई शांति समझौता होता है, तो भी इसे पूरी तरह बंद न करके हालात के हिसाब से जारी रखा जाए।

इसके अलावा, अगर रूस किसी भविष्य के शांति समझौते का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका को फिर से पूरी खुफिया सहायता बहाल करनी होगी।

समिति के अनुसार, इस कदम का मकसद यह साफ करना है कि किसी शांति समझौते के बाद भी अमेरिका यूक्रेन के साथ खुफिया सहयोग जारी रखेगा या नहीं, इस पर कोई भ्रम न रहे।

बेनेट ने कहा कि युद्ध के मैदान में यूक्रेन के प्रदर्शन ने यूरोप की रणनीतिक स्थिति को बदल दिया है।

उन्होंने कहा क‍ि अमेरिका और उसके सहयोगियों के निवेश की वजह से यूक्रेन ने रूस की बढ़त को काफी हद तक रोक दिया है और उसने युद्ध लड़ने की ऐसी क्षमता विकसित कर ली है जो नाटो के किसी भी सदस्य देश में नहीं देखी गई।

उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन की सेना अब इस स्थिति में है कि वह ‘यूरोप में किसी भी भविष्य के रूसी आक्रमण को रोकने और हराने के लिए अमेरिका और नाटो के प्रयासों में योगदान दे सके।’

यह कानून अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस को यह निर्देश भी देता है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सहयोगी देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड के साथ खुफिया सहयोग को मजबूत करे। इसके अलावा भारत और वियतनाम जैसे क्षेत्रीय साझेदार भी इसमें शामिल हैं।

बिल के अनुसार, इस बढ़े हुए सहयोग का मकसद ‘आक्रमण को रोकना, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और गलतफहमियों या गलत आकलन के जोखिम को कम करना’ है।

एक और प्रावधान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों पर केंद्रित है। इसके तहत निर्देश दिया गया है कि जब भी कोई उन्नत एआई तकनीक विदेशी देशों को निर्यात की जाए या अमेरिकी सरकार किसी विदेशी सरकार के साथ एआई समझौता करे, उससे पहले उसका आकलन किया जाए।

इस आकलन में यह देखा जाएगा कि संबंधित देश के एक्सपोर्ट कंट्रोल कैसे हैं, उसका चीन और रूस जैसे विरोधी देशों से कितना संबंध है, और क्या संवेदनशील तकनीक आगे गलत हाथों में जा सकती है।

समिति की रिपोर्ट में खुफिया एजेंसियों को ‘सतत इंटेलिजेंस डिप्लोमेसी में निवेश’ को प्राथमिकता देने के लिए भी कहा गया है।

इसके अलावा, कुछ और कदम भी शामिल हैं जैसे विदेशी साइबर खतरों पर सख्त निगरानी, उन खुफिया कर्मचारियों पर रोक जो गैर-प्रकाशित (गोपनीय) जानकारी से जुड़े प्रेडिक्शन मार्केट्स में हिस्सा लेते हैं और अमेरिकी खुफिया व सैन्य ठिकानों के पास विदेशी जुड़ी रियल एस्टेट डील्स की जांच।

–आईएएनएस

एवाई/पीएम

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