अंकारा, 8 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने मंगलवार को तीसरे देशों में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) की तैनाती को तेज करने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। शुरुआत में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर ध्यान होगा। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनके बढ़ते रणनीतिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो समिट के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने सहयोग के लिए एक मेमोरेंडम (एमओसी) पर साइन किए।
इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि यह समझौता तीनों देशों की बढ़ती साझेदारी का एक ठोस नतीजा है। उन्होंने आगे कहा कि आज दुनिया के सबसे अहम मुद्दों में से एक ऊर्जा सुरक्षा है, जैसा कि हमें होर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरी जगहों पर हो रही घटनाओं से याद दिलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते से तीनों देशों को “छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) पर मिलकर काम करने में मदद मिलेगी, जो कई मायनों में ऊर्जा उत्पादन का भविष्य है। उन्होंने कहा कि इससे हमारी अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
रुबियो ने कहा कि यह समझौता “हमारी त्रिपक्षीय बातचीत का नतीजा” है और यह दिखाता है कि यह मंच ठोस नतीजे दे रहा है। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया के बीच लगातार बातचीत का भी स्वागत किया और कहा कि पिछली चुनौतियों के बावजूद उनके द्विपक्षीय संबंध मजबूत हुए हैं।
रूबियो ने आगे कहा, “मुझे पता है कि यह रिश्ता हाल के समय में और अतीत में भी कई परीक्षाओं से गुजरा है, लेकिन मुझे लगता है कि पिछले तीन-चार सालों में यह और मजबूत हुआ है, और हमने निश्चित रूप से इसे बढ़ावा देने की कोशिश की है, क्योंकि ये हमारे दो बहुत करीबी और अहम सहयोगी हैं।”
जापान के मोटेगी ने इस समझौते पर साइन किए जाने का स्वागत किया और कहा कि तीनों देशों ने पिछले अक्टूबर से ही “ठोस प्रयास” किए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करना और उत्तर कोरिया के साइबर खतरों से निपटना शामिल है। मोटेगी ने कहा, “मैं एसएमआर से जुड़े सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने की इस अहम उपलब्धि का स्वागत करता हूं।”
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ने एसएमआर को लेकरकहा, “हम दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हुए मिलकर काम कर सकते हैं।”
विभाग के अनुसार, इस ढांचे का मकसद तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके लिए फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल को बढ़ावा देना, प्रोजेक्ट के जोखिम कम करना, बड़े पैमाने पर काम करने के फायदे हासिल करना, निजी निवेश आकर्षित करना, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाना और सप्लाई चेन को बेहतर बनाना शामिल है।
विभाग ने कहा कि इस समन्वित दृष्टिकोण से अमेरिकी, जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियां अधिक प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा समाधान कर सकेंगी, साथ ही “परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उच्चतम मानकों” को भी बनाए रखेंगी।
अमेरिका की ओर से स्टेट डिपार्टमेंट के ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढांचा’ प्रोग्राम के लिए 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा की नई फंडिंग का भी ऐलान किया गया। यह फंडिंग इंडो-पैसिफिक देशों को तकनीकी मदद देने, एसएमआर प्रोजेक्ट के विकास को आगे बढ़ाने और वर्कफोर्स डेवलपमेंट के लिए एक क्षेत्रीय ट्रेनिंग हब बनाने में मदद करेगी।
बता दें कि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) ऐसे एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर हैं, जिन्हें पारंपरिक न्यूक्लियर प्लांट की तुलना में कम जगह और कम शुरुआती लागत के साथ भरोसेमंद, कम कार्बन वाली बिजली पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है। कई देश इस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहे हैं। इससे वे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करते हुए सुरक्षित, साफ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत चाहते हैं।
–आईएएनएस
एसडी/पीएम
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