वाशिंगटन, 6 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में एक बड़ा नौसैनिक अभियान शुरू किया है। इसका मकसद वहां फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक पर फिर से आवाजाही शुरू कराना है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को “बंधक” बनाकर बैठा है।
सोमवार को व्हाइट हाउस में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फारस की खाड़ी में हफ्तों से बढ़ रहे तनाव के बाद, फंसे हुए आम नागरिकों के जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को मंज़ूरी दी है। रुबियो ने बताया कि 87 देशों के लगभग 23,000 आम नागरिक व्यापारिक जहाजों पर फंसे हुए हैं। उन्होंने इसकी वजह होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा की गई नाकाबंदी को बताया। यह एक संकरा जलमार्ग है, जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है।
रुबियो ने कहा, “ये बेकसूर नाविक और कमर्शियल जहाज के सदस्य समुद्र में फंसे हुए हैं। इन जहाजों को आप इतने लंबे समय तक समुद्र में यूं ही नहीं छोड़ सकते। वहां खाना खत्म होने लगता है, पीने का पानी खत्म होने लगता है और जरूरी सामान भी खत्म होने लगता है।”
उन्होंने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाकर और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाकर “समुद्री डकैती” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछा रहा है और व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को इसे नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है। उनके मुताबिक कोई देश यह नहीं कह सकता कि वह समुद्र में बारूदी सुरंगें लगाएगा और उसकी बात न मानने वाले जहाजों को उड़ा देगा।
रुबियो ने बार-बार कहा कि अमेरिका का यह अभियान हमला करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पहले गोली नहीं चलाएगी और केवल आत्मरक्षा में जवाब देगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक अमेरिकी नौसेना और वायुसेना मिलकर व्यापारिक जहाजों के लिए एक तरह का “सुरक्षा घेरा” बना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी झंडे वाले दो व्यापारिक जहाज इस अभियान के पहले चरण में सुरक्षित रूप से स्ट्रेट को पार कर चुके हैं।
रुबियो ने बताया कि इस अभियान में गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 100 से ज़्यादा विमान, मानवरहित सिस्टम और लगभग 15,000 अमेरिकी सैनिक शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सात तेज़ रफ़्तार नावों को पहले ही नष्ट कर दिया है, जो चेतावनी दिए जाने के बावजूद जहाजों के बहुत करीब आ गई थीं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने और जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के लिए लगातार अभियान चलाता रहेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे हालात स्वीकार नहीं कर सकती, जहां ईरान जैसा देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते पर कब्जा जमाने लगे।
रुबियो ने बताया कि अमेरिका इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी उठा रहा है। अमेरिका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र ईरान की निंदा करे, जहाजों पर हमले रोकने को कहे, समुद्र में बिछाई गई सुरंगें हटाने का दबाव बनाए और मानवीय सहायता को गुजरने दे। उन्होंने कहा कि कई देशों ने निजी तौर पर अमेरिका से मदद मांगी है, लेकिन फिलहाल इतनी तेजी से बड़े पैमाने पर सैन्य ताकत भेजने की क्षमता सिर्फ अमेरिका के पास है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका यह कदम पूरी दुनिया की मदद के लिए उठा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने इस समुद्री संकट को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में उसके बढ़ते प्रभाव से भी जोड़ा है। रुबियो ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए तो स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाएगी। उनके मुताबिक तब ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी मनमर्जी चला सकता है।
बता दें कि ये स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
–आईएएनएस
एएस/
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