वाशिंगटन, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। एक वरिष्ठ अमेरिकी लॉमेकर ने ईस्टर से पहले धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में चीन के रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर ईसाइयों को सताने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही देश में अधिक स्वतंत्रता की मांग की है।
चीन संबंधी चयन समिति के अध्यक्ष जॉन मूलेनर ने कहा कि चीन में कैद ईसाइयों का विश्वास राज्य के दमन के बावजूद दूसरों को प्रेरित करता रहेगा।
ईस्टर के अवसर पर जारी एक बयान में मूलेनर ने कहा कि जब ईसा मसीह (जीसस) के शिष्य ‘पॉल’ को उनके धर्म की वजह से जेल में डाला गया था, तो उन्होंने लिखा था- ‘मेरे जेल जाने से बाकी लोगों का डर खत्म हो गया है और उन्हें और ज्यादा हिम्मत मिली है। अब वे बिना किसी डर के प्रभु के संदेश को फैला रहे हैं।’
मूलेनर ने कहा कि आज चीन में भी बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है। वहां की कम्युनिस्ट सरकार ने पादरी जिन, जिमी लाई और कई अन्य ईसाइयों को जेल में बंद कर रखा है। लेकिन इससे लोग डरेंगे नहीं, बल्कि उन्हें ईसा मसीह के संदेशों को दूसरों तक पहुंचाने की और ज्यादा प्रेरणा मिलेगी।
मूलेनर ने चीनी नेतृत्व से अपना रुख बदलने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “इस रविवार को जब हम ईस्टर मना रहे हैं, तो मैं प्रार्थना करता हूं कि जिस प्रकार पौलुस कभी ईसाइयों का क्रूर उत्पीड़क था, उसी प्रकार शी जिनपिंग और सीसीपी को भी सच्चाई का ज्ञान हो और वे चीन के लोगों को धर्म की स्वतंत्रता दें, एक ऐसा अधिकार जो हमें अमेरिकियों के रूप में 250 वर्षों से प्राप्त है।”
ये टिप्पणियां वाशिंगटन में चीन द्वारा ईसाई, मुस्लिम और अन्य धर्म समूहों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ किए जा रहे व्यवहार की निरंतर जांच के बीच आई हैं।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों ने धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े पूजा-पाठ पर प्रतिबंध, निगरानी और हिरासत पर चिंता व्यक्त की है।
यह बयान वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापक तनाव को भी दर्शाता है, जहां मानवाधिकार मुद्दे व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा विवादों के साथ-साथ लगातार टकराव का कारण बने हुए हैं।
–आईएएनएस
ओपी/एएस
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