वाशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है, क्योंकि मध्य पूर्वी देश ने आंशिक रूप से अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) फिर से खोल दिया है।
सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में, विदेश विभाग के कांसुलर मामलों के ब्यूरो ने अमेरिकियों से कहा कि वे स्थानीय मीडिया पर नजर रखें और देश से बाहर जाने वाली उड़ानों की जानकारी के लिए वाणिज्यिक एयरलाइंस से संपर्क करें।
इस सलाह में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक आर्मेनिया, अजरबैजान, तुर्किये और तुर्कमेनिस्तान के रास्ते भूमि मार्ग से भी ईरान छोड़ सकते हैं। हालांकि इसमें अफगानिस्तान, इराक या पाकिस्तान-ईरान सीमा क्षेत्र की यात्रा से बचने की चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था।
देश ने शनिवार को अपने पूर्वी हवाई क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए फिर से खोल दिया, जिससे हवाई अड्डों के आंशिक संचालन की शुरुआत हुई।
रविवार को ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक ब्रॉडकास्टिंग ने नागरिक उड्डयन संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि देश का हवाई क्षेत्र चार चरणों में फिर से खोला जाएगा।
इस बीच, बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है और तेहरान पर आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है। सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है…और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को कुछ लचीलापन भी दिया है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई रोकने का मतलब दबाव कम करना नहीं है। उन्होंने कहा, “सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है, लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है।”
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा, “हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं… उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है,” और जोड़ा कि ईरान तेल निर्यात और भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
इसके बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है… और अंतिम निर्णय कमांडर इन चीफ के हाथ में होगा,” और उन्होंने छोटी समय-सीमा की खबरों को खारिज किया।
–आईएएनएस
पीएम
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