नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। दुनिया भर के नेताओं ने ईरान युद्ध और उससे पैदा हो रहे बड़े आर्थिक संकट को लेकर चेतावनी देनी शुरू कर दी है। इसी बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है और इसके आर्थिक नुकसान और बढ़ सकते हैं।
वोंग ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है, और इसका असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई भी लगातार कम होती जा रही है। एशिया इस स्थिति से खास तौर पर प्रभावित हो रहा है, क्योंकि यहां के देश ऊर्जा और दूसरी जरूरी चीजों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र के कुछ देशों में पहले से ही ईंधन की कमी देखने को मिल रही है। एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं। फैक्ट्रियों में देरी हो रही है और यह रुकावट सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में खाद, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों पर भी असर पड़ेगा। हमें आगे और भी चीजों की कमी देखने को मिल सकती है।
वोंग ने आगे कहा कि भले ही होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाए, लेकिन हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि बंदरगाहों और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, और समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटाने में समय लगेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शिपिंग कंपनियों को भरोसा दिलाना होगा कि रास्ता सुरक्षित है, बीमा आसानी से मिलेगा और लोग फिर से इस रास्ते से जाने का जोखिम लेने के लिए तैयार होंगे। ये सब चीजें एक दिन में ठीक नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि हालात सामान्य होने में कम से कम कई महीने लग सकते हैं।
वोंग ने कहा, “इसलिए हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि यह संकट जल्दी खत्म हो जाएगा। बल्कि दबाव और बढ़ सकता है। सप्लाई में रुकावटें बनी रहेंगी और आने वाले महीनों में हालात और खराब भी हो सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ेगी। यह पहले ऊर्जा में बढ़ेगी, फिर खाने-पीने की चीजों में और उसके बाद बाकी जरूरी सामानों में भी फैल जाएगी। कुछ देशों की अर्थव्यवस्था मंदी में जा सकती है, और इसका असर सिंगापुर पर भी सीधे पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि इस साल विकास (ग्रोथ) पहले ही धीमा रहा है, महंगाई बढ़ेगी, और इसका दबाव कंपनियों, कर्मचारियों और आम लोगों पर साफ दिखाई देगा।
वोंग ने 1970 के दशक के तेल संकट का भी जिक्र किया, जब दुनिया की अर्थव्यवस्था में ‘स्टैगफ्लेशन’ की स्थिति बन गई थी। स्टैगफ्लेशन का मतलब होता है ऐसा हाल जिसमें महंगाई बहुत ज्यादा होती है, लेकिन आर्थिक विकास रुक जाता है और बेरोजगारी बढ़ती है। यह स्थिति लोगों और कारोबार दोनों के लिए बहुत मुश्किल होती है।
उन्होंने कहा कि अब फिर से स्टैगफ्लेशन का खतरा बढ़ रहा है। और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी चेतावनी दी है कि यह संकट जितना लोग सोच रहे हैं, उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आने वाले समय के लिए तैयार रहें, क्योंकि हालात आसान नहीं होने वाले हैं।
–आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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