बुडापेस्ट, 16 अगस्त (आईएएनएस)। हंगरी इस समय दशकों के सबसे गंभीर सूखे और जल संकट से जूझ रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुडापेस्ट में डेन्यूब नदी के भीतर सदियों से छिपी ‘रॉक ऑफ स्टार्वेशन’ यानी ‘भुखमरी की चट्टान’ लगभग पूरी तरह दिखाई देने लगी है। हाल ही में हंगरी के पक्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र को भी बंद करना पड़ा था। शनिवार को एक कोशिश कुछ हद तक रंग लाती दिखी। नदी के रिकॉर्ड निचले जलस्तर के बीच पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए अंडरवाटर वियर (नदी तल पर बांधनुमा संरचना) का निर्माण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाया गया।
प्रधानमंत्री पीटर मैज्यार ने शनिवार को कहा कि नदी के दोनों किनारों पर निर्माण कार्य जारी है। मैज्यार ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि शनिवार को अकेले पक्स में करीब 5,000 टन पत्थर पहुंचाया गया। यह पत्थर नदी तल में बनाई जा रही संरचना के निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्थानीय मीडिया आउटलेट डेली हंगरी न्यूज के अनुसार, उन्होंने पक्स परमाणु संयंत्र के कोल्ड-वॉटर चैनल के पास एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जलस्तर में और गिरावट के पूर्वानुमान के बावजूद संयंत्र के आसपास पानी का स्तर फिलहाल बढ़ा है। इसका एक कारण नदी में दो 80 मीटर लंबी बजरी की स्थिति है। इससे संयंत्र के कूलिंग सिस्टम तक आवश्यक पानी पहुंचाने में अस्थायी मदद मिली है।
पक्स संयंत्र डेन्यूब के पानी पर अपने रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए निर्भर है। इस वर्ष यूरोप में लंबे सूखे और भीषण गर्मी के कारण डेन्यूब का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। इसके चलते पक्स को अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में भारी कटौती करनी पड़ी थी।
हंगरी सरकार ने नदी के जलस्तर को स्थिर रखने के लिए लगभग 1.45 लाख घन मीटर चट्टानों के इस्तेमाल से वियर बनाने की योजना बनाई है। इससे संयंत्र के पास जलस्तर में करीब एक मीटर तक की वृद्धि होने की उम्मीद है।
बजरी को नियंत्रित तरीके से डुबोना भी एक अस्थायी उपाय है, जिससे पक्स के कूलिंग पंपों के आसपास जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर तक अतिरिक्त वृद्धि की जा सकती है।
यह संकट केवल हंगरी तक सीमित नहीं है। पड़ोसी रोमानिया में भी डेन्यूब के कम जलस्तर के कारण चेर्नावोडा परमाणु संयंत्र के दोनों रिएक्टर बंद करने पड़े हैं।
हंगरी इस समय दशकों के सबसे गंभीर सूखे और जल संकट से जूझ रहा है। देश से होकर गुजरने वाली डेन्यूब नदी का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर खेती, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन पर पड़ रहा है।
–आईएएनएस
केआर/
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