नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया के हालात बेहद संवेदनशील हैं। अमेरिका-ईरान में संघर्ष विराम की उम्मीद हर गुजरते दिन के साथ धुंधलाती जा रही है। अमेरिका ने लगातार आठ रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों और प्रमुख केंद्रों को निशाना बनाया। इसमें एक बोंजी डिसैलिनेशन (अलवणीकरण) प्लांट भी शामिल था। ईरान ने कहा कि हमले के बाद 20 गांवों के करीब 10 हजार लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पाएगा। फिर जवाब में ईरान ने भी कुवैत के ऐसे ही प्लांट को निशाना बनाया।
कुवैत ने कहा कि ईरान ने दूसरे दिन उसके पानी के प्लांट को निशाना बनाया। कहा गया कि इससे छोटे रेगिस्तानी देश में जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है। कुवैत ही नहीं गल्फ के छह देश डिसैलिनेशन प्लांट पर ही निर्भर हैं। ये प्लांट उनके लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं हैं।
ये वो संयंत्र हैं जो समुद्र के खारे पानी को साफ कर उन्हें मीठा या पीने योग्य बनाते हैं। जिन देशों में प्राकृतिक मीठे पानी की कमी होती है, वहां यह तकनीक पानी का सबसे बड़ा स्रोत है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लेकर कुवैत तक, खाड़ी के तटों पर 400 से अधिक डिसैलिनेशन संयंत्र स्थित हैं, जो दुनिया के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराते हैं।
अरब सेंटर वॉशिंगटन डीसी द्वारा प्रकाशित 2023 के एक शोध पत्र के अनुसार, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के छह सदस्य देश दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत डिसैलिनेशन क्षमता रखते हैं और विश्व स्तर पर उत्पादित कुल शुद्ध जल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तैयार करते हैं।
गल्फ रिसर्च सेंटर की 2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भूजल और डिसैलिनेटेड पानी मिलकर इस क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत मुख्य जल संसाधनों की पूर्ति करते हैं। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल की गुणवत्ता खराब होने लगी है, जिसके चलते खाड़ी देशों ने अपनी जल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा-खपत वाले सी वॉटर प्लांट्स पर काफी अधिक निर्भरता शुरू कर दी है।
कुछ देशों की पानी की जरूरत लगभग पूरी तरह इन संयंत्रों पर निर्भर है। कुवैत में पीने के पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा डिसैलिनेशन संयंत्रों से आता है। वहीं ओमान में यह आंकड़ा लगभग 86 प्रतिशत, सऊदी अरब में 70 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात में करीब 42 प्रतिशत है। सऊदी अरब दुनिया में सबसे अधिक अलवणीकृत पानी का उत्पादन करने वाला देश है।
ईरान भी अलवणीकरण संयंत्रों का उपयोग करता है, जिन्हें खाड़ी क्षेत्र के तटीय इलाकों, जैसे कि किश्म द्वीप, में स्थापित किया गया है। हालांकि, ईरान के पास कई नदियां और बांध भी हैं और वह खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में डिसैलिनेशन संयंत्रों पर उतना अधिक निर्भर नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र में पानी की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। यहां का मौसम बेहद शुष्क है, बारिश भी बहुत कम और अनियमित होती है। ऐसे में अगर पानी उपलब्ध कराने वाले प्रमुख संयंत्रों पर हमला होता है, तो इसका सीधा असर लाखों लोगों की जल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
–आईएएनएस
केआर/
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