Keir Starmer Resignation : ब्रिटिश राजनीति अपने खराब दौर से गुजर रही है। स्ट्रोंग और स्टेबल सरकार की कमी साफ़ झलक रही है। अपनी ही पार्टी के सांसदों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्टार्मर ने पीएम पद के साथ-साथ लेबर पार्टी के नेतृत्व से भी हटने की घोषणा की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टार्मर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर आकर देश के नाम अपना विदाई संदेश पढ़ा।
क्या बोले स्टार्मर

इस्तीफे की घोषणा करते हुए स्टार्मर ने कहा कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे केवल उस देश को सबसे ऊपर रखने के लिए थे जिससे वह बेहद प्यार करते हैं। उन्होंने इस पूरे सफर में अपनी पत्नी विक का आभार जताते हुए उन्हें अपना सबसे मजबूत सहारा बताया।
स्टार्मर ने कहा कि अब वह राजनीति से इतर अपने बच्चों के लिए एक बेहतर पिता बनना चाहते हैं, जो उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी और गर्व हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह देश के अगले प्रधानमंत्री को अपना समर्थन देना जारी रखेंगे।
कौन हो सकते हैं अगले प्रधानमंत्री

बता दें, स्टार्मर के बाद अब अगले नाम पर चर्चा तेज होने लगी है। जानकारी के अनुसार अगले प्रधानमंत्री की रेस में लेबर पार्टी के दिग्गज नेता एंडी बर्नहम का नाम सबसे आगे चल रहा है। पिछले हफ्ते हुए एक उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने वाले एंडी बर्नहम आज सोमवार को वेस्टमिंस्टर में मेकरफील्ड सीट के सांसद के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे। बर्नहम को लंबे समय से पार्टी के भीतर कीर स्टार्मर का धुर विरोधी और बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है।
उनकी इस हालिया चुनावी जीत के बाद से ही लंदन के राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे थे कि अब स्टार्मर की कुर्सी जानी तय है। बताया जा रहा है कि लेबर पार्टी के 100 से अधिक सांसद और कई मौजूदा कैबिनेट मंत्री स्टार्मर की कार्यशैली से बेहद असंतुष्ट थे और उनके खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर चुके थे।
10 साल में 6 प्रधानमंत्री बदले
यह सिर्फ कीर स्टार्मर के लिए चिंता की बात नहीं बल्कि इस इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन की राजनीति का एक बेहद चिंताजनक दौर भी सामने आया है। बता दें, पिछले महज 10 वर्षों के भीतर ब्रिटेन ने अपने 6 प्रधानमंत्रियों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही विदा कर दिया है। इस फेहरिस्त में डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक जैसे कद्दावर नेताओं के नाम शामिल हैं। ब्रिटेन में संसद इस मामले में बहुत लचीली है।
ब्रिटेन में लगातार बदलती सरकारों के पीछे मुख्य रूप से देश की आर्थिक बदहाली और जनता की नाराजगी है। ब्रेग्जिट के बाद से ही ब्रिटेन की जनता गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है।
ब्रिटेन की राजनीतिक व्यवस्था के तहत यदि किसी सत्तारूढ़ दल के महज 15 से 20 प्रतिशत सांसद भी अपने ही प्रधानमंत्री के कामकाज से नाखुश हो जाएं, तो वे उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग कर सकते हैं। यह उनकी कमजोरी नहीं बल्कि संसद का लचीलापन दिखाता है। अंदरूनी खींचतान का यही लचीला नियम ब्रिटेन में बार-बार सरकारों को गिराने और नेतृत्व बदलने की सबसे बड़ी वजह साबित हो रहा है।


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