कुवैत/वाशिंगटन, 28 मई (आईएएनएस)। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने सुबह दावा किया था कि उसने अमेरिका के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है, तब उस देश के नाम का खुलासा नहीं किया गया था। अब जाहिर हुआ है कि वह सैन्य प्रतिष्ठान कुवैत में मौजूद था। ईरान की इस कार्रवाई का जीसीसी, यानी गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, ने विरोध किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थीं, जिसे कुवैती सेना ने हवा में ही मार गिराया। अमेरिका ने इसे सीजफायर का गंभीर उल्लंघन बताया है।
सेंटकाम के मुताबिक 27 मई की रात 10:17 बजे ईरान ने कुवैत की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल भेजी थी।
अमेरिका ने कहा कि मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास 5 वन-वे अटैक ड्रोन भी भेजे थे, जिन्हें अमेरिकी सेना ने इंटरसेप्ट कर लिया।
सेंटकाम ने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने बंदर अब्बास स्थित ईरानी ग्राउंड कंट्रोल साइट से छठा ड्रोन लॉन्च होने से भी रोक दिया। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरानी आक्रामकता से अपने सैनिकों और हितों की रक्षा के लिए सतर्क हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हुए मिसाइल हमले की कई खाड़ी देशों ने कड़ी निंदा की है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब ने इस हमले को कुवैत की संप्रभुता का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया है।
हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात ने अपने बयान में सीधे तौर पर ईरान का नाम लेते हुए इसे “आतंकी हमला” करार दिया।
तीनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने सोशल मीडिया पर जारी बयानों में कहा कि वे कुवैत की सुरक्षा, स्थिरता और संप्रभुता बनाए रखने के लिए उठाए गए हर कदम के साथ खड़े हैं।
इस बीच, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के महासचिव जसेम मोहम्मद अल बुदावी ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन हैं।
उन्होंने कहा कि जीसीसी के सभी सदस्य देश कुवैत की सुरक्षा और उसके नागरिकों व निवासियों की रक्षा के लिए उसके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास के पास स्थित एक ईरानी ड्रोन बेस पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। सेंटकाम ने दावा किया था कि उसने ईरान के कुछ ड्रोन को मार गिराया है। इसके जवाब में ही आईआरजीसी ने सैन्य बेस पर हमले की बात कही थी।
–आईएएनएस
केआर/
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