पटना, (पंजाब केसरी) : बिहार युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ललन कुमार ने कहा कि लीची की फसल तैयार होने में कम ही समय रह गया है लेकिन आरा मशीन के बंद रहने से इसकी पैकैजिंग के लिए बक्से बनाने का काम नहीं शुरू हुआ है। लीची के पैकेजिंग के लिये आमतौर पर लकड़ी के बक्से का प्रयोग होता है।
उन्होंने कहा कि इस साल लीची फसल अनुकूल मौसम के कारण काफी अच्छी है। आम तौर पर 15 से 20 मई के बीच शाही लीची पककर तैयार होता है लेकिन मई के पहले सप्ताह से ही मुजफ्फरपुर के शाही लीची को तोडऩे का काम व्यापारी शुरू कर देते हैं। लेकिन कोरोना संकट के कारण देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण इस साल व्यापारियों को लीची को दूसरे राज्यों में भेजने पर अभी से संकट दिखाई पड़ रहा है। ललन ने कहा कि देश के कुल लीची उत्पादन का 40 फीसदी उत्पादन सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले में होता है। देश में 5 लाख टन लीची का उत्पादन होता है। जिसमें बिहार देश का 70 फीसदी लीची उत्पादन करता है जिसमें से अकेले 40 फीसदी लीची मुजफ्फरपुर में होती है। यानि बड़े पैमाने पर लीची की बागवानी नकदी फसल के विकल्प के तौर पर किसान लीची की बागवानी करते हैं।
युवा कांग्रेस नेता ने कहा कि 10 हजार करोड़ की इकोनॉमी लीची की बागवानी से जुड़ी हुई है जिसमें से सबसे अधिक फ्रेश लीची का कारोबार दूसरे राज्यों में लीची को भेजकर ही किया जाता है लेकिन कोरोना संकट के कारण हुए लॉक डाउन में लकड़ी के बक्से के निर्माण की अनुमति के साथ ही गाडिय़ों के परमिट के बारे में किसान परेशान हो रहे हैं।


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