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महिला विकास के ब्रांड अम्बेस्डर हैं सीएम नीतीश कुमार : डॉ. रणबीर नंदन

जदयू के प्रवक्ता व पूर्व विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन ने बिहार में महिलाओं के विकास में नीतीश सरकार के योगदान को सराहा है।

पटना: उन्होंने कहा है कि महिलाओं का विकास नारों से नहीं कार्यों से होगा। बिहार में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने यह कर के दिखाया है। नीतीश कुमार देश भर में महिलाओं के विकास के ब्रांड अम्बेस्डर हैं। 
उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना देश और समाज का विकास संभव नहीं है। मातृशक्ति को जब तक आप विकास से नहीं जोड़ेंगे, तब संपूर्ण विकास की परिकल्पना संभव नहीं है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को अपनी शक्ति का आभास कराने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका को सदैव याद किया जाएगा। प्रदेश के स्कूलों में कभी 70 फीसदी से अधिक छात्रों का दाखिला होता था तो छात्राएं 30 फीसदी हुआ करती थीं। लेकिन, स्थिति में बदलाव साफ तौर पर दिखता है। वर्ष 2005 में प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद छात्राओं को स्कूलों, खासकर हाई स्कूल की दहलीज तक लाने की कवायद शुरू हुई। आज के समय में स्थिति ऐसी है दसवीं छोड़ दीजिए, 12वीं की परीक्षा में छात्र और छात्राओं की संख्या बराबर है। इस उपलब्धि के पीछे नीतीश कुमार का बच्चियों को साइकिल देने की योजना का बड़ा हाथ रहा है।
डॉ. नंदन ने कहा कि साइकिल पर बैठी छात्राएं स्कूल और कॉलेज की सीढ़ियों को पार करने लगी तो मुख्यमंत्री ने उनके लिए नौकरियों की व्यवस्था कर दी। सरकारी नौकरियों में 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इससे महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। महिलाओं को राज्य सरकार स्वरोजगार से भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अनुसूचित जाति की महिलाओं को आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने महिला समृद्धि योजना की शुरुआत की है। महिलाओं की एक आवाज पर मुख्यमंत्री ने शराबबंदी की घोषणा कर दी।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकाय और शहरी निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देकर उन्हें निर्णय लेने का अधिकार दिया है। महिलाओं को निर्णय लेने से जोड़कर मुख्यमंत्री ने विकास की रफ्तार डबल डिजिट में रखा है। मुख्यमंत्री के निर्णयों का परिणाम रहा कि आज के समय में 27.8 फीसदी महिलाएं दसवीं पास हैं। कभी यह आंकड़ा 20 फीसदी से नीचे था। पिछले डेढ़ दशक में इस आंकड़े को हासिल किया जा सका है।
डॉ. नंदन ने कहा कि प्रदेश की 15 से 64 वर्ष की 12.6 फीसदी महिलाएं काम करती हैं। डेढ़ दशक में आंकड़ा 8 फीसदी के नीचे था। विधायिका से लेकर उच्च पदों तक बिहार की 7.8 फीसदी महिलाएं पहुंच रही हैं। यह संख्या पहले के समय में काफी कम थी। मातृशक्ति को उचित स्थान देने के लिए हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देते हैं।

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