पटना : पूर्व सांसद शरद यादव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा को भंग कर लोकतंत्र का गला घोंटा गया है। मैं राज्य में विधानसभा के विघटन का विरोध तथा निंदा करता हूं। सरकार की यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण है जब प्रमुख दलों के गठबंधन ने सरकार बनाने के लिए दावा किया था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों को राज्य में प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी के बिना अनुमति दी जो कि लोकतंत्र का मजाक था।
बीजेपी को न तो भारत के संविधान की चिंता है और न ही यहां के संस्थानों के प्रति सम्मान। राज्य में विधानसभा चुनाव का औचित्य ही क्या है जब लोगों के जनादेश को कुचल कर विधानसभा को भंग कर दिया गया और इसी प्रकार शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव का कोई मतलब नहीं था जब प्रमुख राजनीतिक दल भाग ही नहीं ले रहे थे। बीजेपी के शासनकाल के दौरान देश में जो भी हो रहा है वह लोकतंत्र और जनता के जनादेश के खिलाफ है।
श्री यादव ने कहा कि बीजेपी की अगुआई वाली इस सरकार का हर फैसला जनविरोधी है। चाहे वह वैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करना होए बैंकों को नष्ट करना हो या भारत के संविधान की अवज्ञा करनी हो बीजेपी उन सब कामों में निपुण है जो देश को बर्बादी की राह पर ले जाती हैं। देश की मौजूदा स्थिति से यहाँ के नागरिक तंग आ चुके हैं।
मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि सत्तारूढ़ दल सरकार चलाने के अपने तरीके में बदलाव क्यूं नहीं लाना चाहती जब समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों द्वारा सरकार के हर फैसले का विरोध सार्वजनिक रूप से देखा जा रहा है। मैं भारत सरकार और सत्तारूढ़ दल को सलाह देना चाहता हूं कि हमारे संविधान में निर्धारित मानदंडों का पालन करे और सत्ता में बने रहने के लिए ओछी राजनीति करने से बाज आये।


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