पटना : आम आदमी पार्टी ने बिहार में प्रति वर्ष आने वाले बाढ़ और इसके कारण जान माल की भीषण नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता गुल्फिशा युसुफ ने बिहार में प्रतिवर्ष बाढ़ की रोकथाम का स्थाई निदान ढूंढकर इसका स्थाई निदान निकालने की मांग बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की है।
पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता गुल्फिशा युसुफ ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा है कि- बिहार पिछले पंद्रह सालों से इंजीनियर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ में है, बावजूद इसके बिहार में बाढ़ की विभीषिका की रोकथाम का स्थाई निदान नहीं निकल पाना आश्चर्य की बात है। बिहार में अगर जनता आम आदमी पार्टी की सरकार आती है तो हम दो वर्षों के भीतर बाढ़ की समस्या स्थाई निराकरण करेगे।
उन्होंने बिहार सरकार का ध्यनाकृष्ठ कराते हुए कहा कि आज बिहार की करीब दस लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ पीड़ितों को बचाने के लिए घर का सामान और मवेशी छोड़ नेशनल हाईवे और दूसरे ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण ले रहे हैं। बिहार सरकार की ओर से दो चार पीछे इनके लिए राहत के रूप में छह हजार की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है जो की काफी कम है। सरकार इस राशि को दुगुना कर कम से कम बारह हजार करे। इस मंहगाई के जमाने में पूर्व में घोषित सहायता राशि काफी कम है। आज बिहार के 12 जिले बाढ़ प्रभावित हैं। बाढ़ से अबतक 21 लोगों की मौत हो चुकी है।इस बात से कतई इनकार नहीं कर सकते कि अगर बाढ़ भ्रस्ट अफसरों की अनदेखी का भी परिणाम हो सकता है।
263.47 करोड़ रुपये की लागत से बना गोपालगंज में गंडक नदी पर सतरघाट पुल का बिहार के सीएम नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटन के एक महीने बाद ढह जाना इसका ताजा उदाहरण है। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए थी, दोषी विभाग और मंत्री को बचाने के उद्देश्य से अब तक बिहार सरकार ने इसकी अनुशंसा नहीं की है।पूर्वी चंपारण में सोमवती नदी पर बना पुल भी बाढ़ के पानी का दवाब झेल नहीं सका और देखते देखते बह गया।
नहरों की कटाई, बांध निर्माण आदि में भ्रटाचार जगजाहिर है जो बाढ़ की विभीषिका को बढ़ाने में सहायक है। नीतीश सरकार को जवाब देना चाहिए की कटिहार, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, भागलपुर, सीतामढ़ी, गोपालगंज, समस्तीपुर, मोतिहारी जैसे जिलों के लोग लगभग प्रतेक वर्ष चार माह बेबस, लचर और अपनी बर्बादी झेलने की मजबूर है। प्रति वर्ष करोड़ों रुपए की क्षति से राज्य की अर्थ व्यवस्था को भी गहरा झ्टका लग रहा है। आखिर इसका जिम्मेवार कौन है ???


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