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50 हजार से ज्यादा भक्तों ने की शक्तिपीठ मां चण्डिका मंदिर में पूजा-अर्चना

बिहार के मुंगेर जिले में शक्तिरूपिणी देवी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू हो गई है।
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की जाती है पूजा
आज नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि पूजा के मौके पर शक्तिपीठ मां चंडिका मंदिर में सुबह 4 बजे से ही भक्तों का समूह मां के नेत्र की पूजा के लिए पहुंचना शुरू हो जाता है।
आज शाम करीब 50 हजार श्रद्धालु देवी मां का कर चुके है दर्शन
मंदिर में मुंगेर जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिले खगड़िया, बेगुसराय और भागलपुर जिले से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आज शाम तक करीब 50 हजार श्रद्धालु देवी मां का जलाभिषेक कर चुके हैं। पहाड़ संकीर्ण गुफा में मां चंडिका के नेत्र पूजन में श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अरघा के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था की है। भक्त कतारबद्ध होकर आते हैं और अरघा के माध्यम से मां के चरणों में गंगा जल, फल, फूल और नैवेद्य समर्पित करते हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों 24 घंटे तैनात
वही, शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 24 घंटे में तीन शिफ्ट में दंडाधिकारी व पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है।
मंदिर में हर साल 50 से 100 तांत्रिक भी अपनी सिद्धि पाने के लिए पहुंचते हैं
मंदिर के पुजारी मुकेश पंडा ने कहना है कि नवरात्र पूजा के दौरान प्रतिदिन 50 हजार से एक लाख श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि मंदिर में हर साल 50 से 100 तांत्रिक भी अपनी सिद्धि पाने के लिए पहुंचते हैं। साथ ही मान्यता भी है कि अंग देश के राजा कर्ण प्रतिदिन मां चंडिका मंदिर में खौलते तेल के कड़ाहे में कूद जाते थे। मां चण्डिका उन्हें प्रतिदिन जीवित कर देती थीं और सवा मन सोना भक्ति से प्रसन्न होकर राजा कर्ण को देती थीं। राजा कर्ण अपने मुंगेर स्थित महल के दरबार में सवा मन सोना गरीबों को दान कर देते थे।
मंदिर के दरवाजे सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक भक्तों के लिए खुले
आपको बता दे कि मंदिर के दरवाजे सुबह 4 बजे खुलते हैं और रात 10 बजे तक भक्तों का आना जारी रहता है। वही ऐसी मान्यता है कि देवी मां के दरबार में श्रद्धापूर्वक जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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