AR Rahman Controversy: बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार अल्ला रक्खा रहमान जिन्हें हम AR Rahman के नाम से जानते है, एक ऐसे संगीतकार है जो अक्सर विवादों से दूर रहना पसंद करते है। उनका काम इतना अनोखा और अलग होता है कि केवल अपने संगीत के दम पर उन्होंने ऑस्कर अवॉर्ड तक जीता है लेकिन क्या एक वर्ल्ड फेमस म्यूजिक कंपोजर को काम की कमी हो सकती है, या ऐसा हो सकता है कि उन्हें पास काम न हो, और वो भी सालों से।।
AR Rahman Controversy: AR Rahman के बयान से मची हड़कंप, लोगो ने कहा नई “स्वरा भास्कर’ मत बनो

अब जरा आराम से सोचिए। एआर रहमान का करियर जिस दौर में फला-फूला, क्या उस समय देश में पावर शिफ्ट नहीं हुए थे? क्या तब सरकारें नहीं बदली थीं। क्या तब सिस्टम जस का तस था? बिल्कुल नहीं। उस दौर में भी सरकारें बदलीं, सोच बदली, देश बदला। लेकिन रहमान का नाम आते ही कैसेट बिक जाती थीं। हर गली-मोहल्ले में रहमान के गाने बजते थे। तब उन्हें खतरा नहीं दिखा, तब इंडस्ट्री उन्हें कम्युनल नहीं लगी। सवाल ये है कि अगर पावर शिफ्ट से ही इंडस्ट्री बदल जाती है, तो तब क्यों नहीं बदली? तब क्यों रहमान के गानों को ऑस्कर तक मिल रहे थे?
असल बात ये है कि समय बदल गया है और मार्केट भी। एक समय था जब एआर रहमान का नाम ही काफी होता था। फिल्म चाहे फ्लॉप हो, लेकिन रहमान के गाने सुपरहिट होते थे। आज लोग एक क्लिक में गाना स्किप कर देते हैं। इसमें न सरकार की गलती है, न इंडस्ट्री की। ये सब मार्केट का खेल है। जो पसंद आया, वो चल गया। जो नहीं पसंद आया, वो पीछे रह गया।
आज लोग गाना नहीं, पूरा कंटेंट देखते हैं। आज मार्केट में सिर्फ एआर रहमान नहीं है। आज सैंकड़ों सिंगर, म्यूजिक डायरेक्टर, इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट हैं, जो कम बजट में भी लोगों के दिल तक पहुँच रहे हैं। ये कंपीटीशन का दौर है। लेकिन इस कंपीटीशन में उतरने की जगह अगर कोई ये कहे कि मुझे काम इसीलिए नहीं मिल रहा क्योंकि ‘पावर बिना टैलेंट वाले लोगों के हाथों में आ गई है।’
यह एक वरिष्ठ संगीतकार के मुँह से सुना गया बेहुदा बयान से कम कुछ नहीं है, जो खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने के चक्कर में सिर्फ दूसरों को नीचा दिखाना जानता है। ये काम न मिलने का बहाना नहीं तो और क्या है? और यहीं से ‘कम्युनलिज्म’ वाला कार्ड निकाला जाता है। जब खुद को नए दौर में फिट करने में दिक्कत हो रही हो, तो बात घुमा दी जाती है। जबकि बात होनी चाहिए कि आज की ऑडियंस क्या सुनना चाहती है, बात होनी चाहिए कि म्यूजिक में क्या-क्या बदलाव आए हैं। पर सीधा कह दिया जाता है कि इंडस्ट्री बदल गई है।
ये वही विक्टिम नैरेटिव है, जो हम पहले भी देख चुके हैं। वही स्वरा भास्कर वाला। काम न मिले तो सिस्टम दोषी, सरकार दोषी, माहौल दोषी होते हैं। लेकिन जो लोग सचमुच काम करना चाहते हैं, उन्होंने हर दौर में कामयाबी देखी है। चाहे पहले की सरकार रही हो या आज की। आज भी अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल, विशाल ददलानी, प्रीतम चक्रबोर्ती जैसे संगीतकार 10-15 सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
और मजेदार बात ये है कि आज के दौर में तो मौके पहले से कहीं ज्यादा हैं। स्पॉटिफाई, यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म खुले पड़े हैं, जिससे करियर बनाना पहले जितना कठिन नहीं रहा। आज कोई भी अपनी कला सीधे जनता तक पहुँचा सकता है। नए सिंगर बिना किसी गॉडफादर के हिट हो रहे हैं। ऐसे में अगर एआर रहमान जैसे दिग्गज खुद को इस दौर में फिट नहीं कर पा रहे, तो इसमें सरकार की गलती कैसे हो गई?
Chhaava पर एआर रहमान ने क्या कहा

“यह एक बांटने वाली फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने बंटवारे का फायदा उठाया, लेकिन मुझे लगता है कि इसका मकसद बहादुरी दिखाना है। मैंने डायरेक्टर से पूछा था, ‘इस फिल्म के लिए उन्हें मेरी ज़रूरत क्यों पड़ी?’ लेकिन उन्होंने कहा कि इस फिल्म के लिए हमें सिर्फ़ आपकी ज़रूरत है। यह एक मज़ेदार फिल्म है, लेकिन लोग निश्चित रूप से इससे ज़्यादा समझदार हैं। क्या आपको लगता है कि लोग फिल्मों से प्रभावित होंगे? उनके पास एक चीज़ होती है जिसे अंदर की आवाज़ कहते हैं, जो जानती है कि सच क्या है और हेरफेर क्या है,” उन्होंने BBC एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में कहा।
जब पूछा गया कि फिल्म में कुछ बुरा होने पर छावा ‘सुभानअल्लाह’ और ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ क्यों कहता है, तो रहमान ने कहा, “यह बहुत घिसा-पिटा है। यह अजीब लगता है। मुझे लोगों के लिए बहुत सम्मान है। वे इतने बेवकूफ नहीं हैं कि गलत जानकारी से प्रभावित हो जाएं। मुझे इंसानियत पर बहुत भरोसा है। लोगों में ज़मीर, दिल, प्यार और दया होती है।”















