Hritik Roshan On Ramayan: अब तक के इंडियन सिनेमा की सबसे महंगी और मोस्ट एंटीसिपेटेड फिल्म रामायण (Ramayana) को टीजर रिलीज के बाद से ही लोगों से मिले जुले रिएक्शन मिल रहे हैं. खास तौर पर सोशल मीडिया पर फिल्म के VFX को लेकर काफी लोग नाराज है और इसको क्रिटीसाइज भी कर रहे हैं. ऐसे मे अब बॉलीवुड के हैंडसम हंक ऋतिक रोशन ने भी रामायण के VFX के क्रिटीसिज़्म पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर किया है. ऋतिक ने रणबीर कपूर की फिल्म के सपोर्ट में अपनी बात रखी है.
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ऋतिक रोशन ने रामायण को क्रिटीसाइज करने वालों के मुंह पर एक तरीके से तमाचा मारा है और कहा है कि सबका VFX दिखाने का स्टाइल अलग होता है. ऋतिक ने लिखा कि, “हां, खराब VFX होते हैं, कभी-कभी वे इतने खराब होते हैं कि उन्हें देखना तक मुश्किल हो जाता है. खासकर मेरे लिए और तब तो और भी ज्यादा, जब वह कोई ऐसी फिल्म हो जिसका मैं खुद हिस्सा रहा हूं.”
Hritik Roshan On Ramayan: VFX को लेकर ऑब्सेस्ड हैं ऋतिक रोशन

अपनी बात जारी रखते हुए ऋतिक ने VFX पर कहा कि, “11 साल की उम्र में लंदन की एक यात्रा के दौरान मैंने फिल्म ‘Back to the Future’ देखी थी और उस फिल्म ने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. मुझे इसका जुनून सवार हो गया, मैं अपने पिताजी के VHS प्लेयर के साथ बैठकर, एक-एक फ्रेम को पॉज-प्ले करके तब तक देखता रहता, जब तक कि वह प्लेयर खराब नहीं हो गया.”
Hritik Roshan On Ramayan: महीनों तक किया था इंतजार

इसके बाद ऋतिक रोशन ने कहा कि, “मैंने अपनी पॉकेट मनी से ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ से ‘इंडस्ट्रियल लाइट एंड मैजिक – द आर्ट ऑफ स्पेशल इफेक्ट्स’ नाम की एक किताब ऑर्डर की और जुहू पोस्ट ऑफिस में उसके आने का महीनों तक इंतजार किया. वह मेरी जिंदगी का सबसे खुशी भरा दिन था, जब मैंने उस किताब को खोला था. तो उसकी महक मुझे आज भी याद है, उसके बाद और भी कई किताबें आईं.”
Hritik Roshan On Ramayan: रामायण के सपोर्ट में बोले ऋतिक

वहीं ऋतिक रोशन ने उन फिल्मों का भी जिक्र किया जिसने उन्हें प्रेरित किया. एक्टर ने प्रेरणा देने वाली फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा, “आज हमारे बीच कुछ खास लोग- जैसे ‘कल्कि’, ‘बाहुबली’ और ‘रामायण’ जैसी फिल्में बनाने वाले (और हां मेरे पापा भी, जिन्होंने ‘कोई मिल गया’ और ‘कृष’ बनाई)- मेरे हीरो हैं.
उनमें वह हिम्मत और दूरदृष्टि है कि वे कुछ ऐसा कर सकें जो पहले कभी नहीं हुआ और यह सब सिर्फ सिनेमा के प्रति उनके प्यार की वजह से है, ताकि हम यानी दर्शक कुछ ऐसा अनुभव कर सकें जो हमने पहले कभी नहीं देखा. मेरी नज़र में, उन्होंने अपना सारा पैसा और सालों की मेहनत इसलिए दांव पर लगा दी, ताकि कोई और 11 साल का बच्चा भी ठीक वैसा ही महसूस कर सके जैसा मैंने किया था.”
Hritik Roshan On Ramayan: रामायण में VFX दिखाने का तरीका अलग

फिर ऋतिक रोशन ने कहा कि वीएफएक्स हैवी फिल्म बनाने के लिए सालों की मेहनत लगती है. उन्होंने यह भी कहा कि, “मेरी छोटी सी समझ के हिसाब से, जितना मैंने सीखा है, मेकर्स अपनी सोच को पर्दे पर उतारने के लिए अलग-अलग VFX स्टाइल्स अपनाते हैं. यह कॉमिक्स या एनिमेशन जैसा ही है – कुछ लोग ANIME स्टाइल पसंद करते हैं, लेकिन वह ‘स्पाइडर-मैन: इनटू द स्पाइडर-वर्स’ जितना रियलिस्टिक नहीं होता. आप एक स्टाइल को दूसरे से ज्यादा पसंद कर सकते हैं, लेकिन कोई भी स्टाइल गलत नहीं है.”
Hritik Roshan On Ramayan: ऋतिक रोशन ने हॉलीवुड से की तुलना

ऋतिक रोशन यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि, “इसी तरह VFX वाली फिल्में ‘फोटोरियलिस्टिक’ (इनविजिबल) VFX वाली हो सकती हैं, जहां आपको VFX बिल्कुल भी नजर नहीं आता. जैसे जेम्स बॉन्ड, डाई हार्ड, वॉर 1 जैसी बड़े पैमाने की एक्शन फिल्मों में होता है या फिर मेकर्स कहानी कहने के लिए स्टाइलिश VFX अपना सकते हैं, जो ज्यादा जादुई होता है. इसमें कभी-कभी रंग ज्यादा चमकीले होते हैं, लाइटिंग नॉन-रियलिस्टिक होती है और विज़ुअल्स जान-बूझकर खूबसूरत पेंटिंग्स जैसे बनाए जाते हैं. जैसे ‘300’, ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ जैसी फिल्मों में होता है.”
Hritik Roshan On Ramayan: मेकर्स के सपोर्ट में क्या बोले ऋतिक

खराब VFX पर अपनी राय रखते हुए ऋतिक रोशन ने लिखा कि, “खराब VFX तब होता है, जब फिल्म ‘फोटोरियलिज्म’ का वादा तो करती है लेकिन उसे पूरी तरह से निभा नहीं पाती. फिजिक्स या ग्रैविटी में एक छोटी सी चूक भी पूरे भ्रम को तोड़ सकती है या फिर वादा तो स्टोरीबुक स्टाइल का होता है, लेकिन वे उसे इतना खूबसूरत, कलात्मक या दिव्य नहीं बना पाते कि वह दर्शकों को बांध सके. लेकिन यह कहना कि ‘स्टोरीबुक स्टाइल’ फोटोरियलिस्टिक नहीं लग रहा है – सही नहीं है. क्योंकि उसे वैसा बनाया ही नहीं गया है.”
आखिर में अपनी बात खत्म करते हुए ऋतिक ने कहा कि, “और आप किसी मेकर की सिर्फ इसलिए आलोचना नहीं कर सकते, क्योंकि उसने एक खास स्टाइल चुना है जबकि आपको कोई दूसरा स्टाइल पसंद है. यह सही नहीं है, तो कभी-कभी जब आप कहते हैं कि VFX खराब है तो हो सकता है कि वह बस एक ऐसा स्टाइल हो, जिसकी आपको उम्मीद नहीं थी? तो अगली बार, सिर्फ यह मत पूछिए कि क्या यह असली लग रहा है? बल्कि पहले यह पूछिए कि क्या यह कहानी के लिए सही है? क्या यह मुझे वही महसूस करवा रहा है, जो मेकर मुझे महसूस करवाना चाहता था?”


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