टीवी की दुनिया का सबसे फेमस और ऐतिहासिक शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ (Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi) एक बार फिर धमाकेदार मोड़ के साथ दर्शकों के दिलों की धड़कनें बढ़ाने आ गया है। शो के नए प्रोमो ने सोशल मीडिया पर आते ही तहलका मचा दिया है। तुलसी वीरानी की जेल से रिहाई हो रही है, लेकिन शांतिनिकेतन में उनका स्वागत फूलों से नहीं बल्कि नफरत की दीवारों से होने जा रहा है।
बेटों की ‘हत्यारी’ कहकर घर वालों ने बंद किए दरवाजे, क्या तुलसी को मिलेगा हक?

नया प्रोमो बेहद इमोशनल और सस्पेंस से भरा हुआ है। जेल की सजा काटने के बाद जब तुलसी वीरानी रिहा होकर अपने घर लौटने की तैयारी कर रही हैं, तो परिवार के कुछ सदस्य उनके स्वागत के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं । घर के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे तुलसी को ‘हत्यारी’ कह रहे हैं। उनका मानना है कि तुलसी ने अपने ही बेटों की जान ली है, इसलिए उन्हें इस पवित्र घर में कदम रखने का कोई अधिकार नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या तुलसी खुद को बेगुनाह साबित कर पाएंगी या नफरत की यह आग पूरे परिवार को भस्म कर देगी।
शांतिनिकेतन के बीच खिंची बंटवारे की रेखा, मां के लिए बेटे ने उठाया बड़ा कदम

जहां एक तरफ पूरा परिवार तुलसी वीरानी के खिलाफ खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ उनका बेटा अपनी मां के सम्मान के लिए डट गया है । प्रोमो में साफ दिख रहा है कि शांतिनिकेतन में अब सिर्फ दिलों का नहीं बल्कि घर का भी बंटवारा हो चुका है। बेटे का साफ कहना है कि “वो मेरी मां हैं और वो इसी घर में आएंगी। घर के एंट्रेंस (मुख्य द्वार) का भी बंटवारा हो चुका है और वहीं पार्थ अपनी मां के सम्मान में डट जाता है, वो अपनी मां की एंट्री अपने हिस्से से करवाएगा। इस कड़े फैसले के बाद शांतिनिकेतन में अब एक नई जंग की शुरुआत हो चुकी है।
शो में 10 साल का बड़ा लीप आ चुका है। लीप से पहले पार्थ कोई ‘अच्छा बेटा’ नहीं था। वह असल में नेगेटिव (विलेन) बन चुका था। उसने पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए वैष्णवी से शादी का नाटक किया, शराब पीकर घर आने लगा, और अपनी ही पत्नी वैष्णवी के साथ घरेलू हिंसा व गंभीर दुर्व्यवहार (Marital Rape) की कोशिश की।
लीप से ठीक पहले करण ने अपनी जायदाद और शांतिनिकेतन का एक बड़ा हिस्सा पार्थ के नाम ट्रांसफर किया था। कानूनी तौर पर वह हिस्सा अब पार्थ के परिवार (उसकी पत्नी वैष्णवी और उसके बेटे) का है। यही वजह है कि करण और नंदिनी का छोटा बेटा और पार्थ का सगा भाई रौनक वीरानी (Raunak Virani) पूरे हक के साथ कहता है कि “वह मेरी मां हैं और मैं उनकी एंट्री अपने हिस्से के दरवाजे से करवाऊंगा।”
सख्त परवरिश का नया ड्रामा: क्या कंट्रोल और संस्कारों के बीच पिस जाएगी नई पीढ़ी?

कहानी में सिर्फ तुलसी की वापसी का ही हंगामा नहीं है, बल्कि घर के भीतर बच्चों की परवरिश को लेकर भी एक नया विवाद खड़ा हो रहा है । प्रोमो में एक ओर जहां सख्त डिसिप्लिन की बात की जा रही है, वहीं बच्चों को पूरी तरह अपने कंट्रोल में रखने का दावा किया जा रहा है “बच्चे बिगड़ जाएं फिर उन्हें सजा दो, इससे बेहतर है उन्हें पहले ही संभाल लो” वाले इस पुराने ढर्रे से क्या नई पीढ़ी बगावत कर देगी? ड्रामा, इमोशन और सस्पेंस का यह जबरदस्त ड्रामा दर्शकों को टीवी स्क्रीन से बांधे रखने के लिए पूरी तरह तैयार है ।


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