अरसे से अपनी धांसू आवाज, दमदार एक्टिंग और अलग अंदाज से सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले फेमस एक्टर नाना पाटेकर (Nana Patekar) ने अपनी एक्टिंग के दम पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग ही मुकाम हासिल किया था। पर्दे पर उनका गुस्सा हो या फिर कॉमेडी का अनोखा अंदाज, दर्शकों ने हमेशा उन्हें सिर आंखों पर बिठाया। आज हम आपको उनके पूरे फिल्मी सफर की उन चुनिंदा और बेहतरीन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें हर सिनेमा प्रेमी को कम से कम एक बार जरूर देखना चाहिए।
जब सीटी और तालियों से गूंज उठा था हॉल – ‘क्रांतिवीर’ और ‘प्रहार’ जैसी कल्ट फिल्में

नाना पाटेकर का नाम आते ही सबसे पहले उनके मुंह से निकले दमदार डायलॉग्स और उनका रोंगटे खड़े कर देने वाला अंदाज याद आ जाता है। साल 1994 में आई फिल्म ‘क्रांतिवीर‘ उनके करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म में प्रताप तिलक का उनका किरदार आज भी लोगों की जुबान पर है। इस मूवी के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।
इसके अलावा साल 1991 में आई फिल्म ‘प्रहार’ में एक कमांडो के रूप में उनकी डिसिप्लिन और एक्टिंग आज भी युवाओं के लिए इंस्पिरेशन है। इस फिल्म के लिए उन्होंने खुद आर्मी की कड़ी ट्रेनिंग ली थी, जो पर्दे पर साफ झलकता है। इसके अलावा ‘परिंदा‘ और ‘तिरंगा‘ जैसी फिल्मों ने यह बता दिया था कि वे हर तरह के रोल बहुत आसानी से कर सकते हैं।
गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी के बादशाह तक – ‘अग्निसाक्षी’ से ‘वेलकम’ का सफर

नाना पाटेकर सिर्फ गंभीर या गुस्से वाले रोल ही नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार में माहिर थे। साल 1996 में आई थ्रिलर फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ में उनका खतरनाक और साइको पति का रूप आज भी रूह कंपा देता है। इस शानदार एक्टिंग के लिए उन्हें एक बार फिर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था।
वहीं, जब करियर के एक पड़ाव पर लोगों को लगा कि वे सिर्फ सीरियस रोल ही कर सकते हैं, तब उन्होंने साल 2007 में अनीस बज्मी की कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ में ‘उदय शेट्टी‘ का ऐसा किरदार निभाया कि सिनेमाघरों में हंसी के फव्वारे छूट पड़े। ‘मजनू भाई‘ और ‘उदय भाई‘ की जोड़ी आज भी मीम्स और लोगों की जुबान पर जिंदा है। इसके अलावा फिल्म ‘अब तक छप्पन‘ में एनकाउंटर करने वाले पुलिसवाले साधु आगाशे के रूप में उनका शांत और सीरियस अंदाज लोगों को बहुत पसंद आया था।
नाना पाटेकर की एक्टिंग सिर्फ कमर्शियल फिल्मों तक सीमित नहीं थी , बल्कि उन्होंने कई ऐसे गंभीर और शानदार रोल किए, जिन्हें देखकर लोग दंग रह गए। साल 2016 की मराठी मास्टरपीस फिल्म ‘नटसम्राट’ में गणपतराव बेलवलकर के रूप में उनका दर्दनाक और इमोशनल एक्टिंग आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है ।
इसके अलावा फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में एक गूंगे-बहरै पिता ‘जोसेफ‘ के रूप में उन्होंने बिना कुछ बोले अपनी आंखों से जो गहराई दिखाई, वह बेमिसाल थी। वहीं, प्रकाश झा की राजनीतिक ड्रामा फिल्म ‘अपहरण’ में तबरेज आलम का खूंखार और ग्रे शेड वाला किरदार हो या फिल्म ‘राजनीति’ में एक समझदार राजनीति का मास्टरमाइंड ‘बृज गोपाल‘ का रोल, नाना ने हर बार यह साबित किया कि उनसे बेहतर एक्टिंग की गहराई को कोई नहीं समझ सकता।
तीन बार नेशनल अवॉर्ड और पांच दशकों का बेमिसाल सफर

नाना पाटेकर ने अपने पचास साल लंबे करियर में लगभग 55 से 60 फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी हर फिल्म अपने आप में एक पाठशाला थी। उन्हें अपने बेहतरीन अभिनय के लिए कुल तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) से सम्मानित किया गया था- फिल्म ‘परिंदा‘, ‘क्रांतिवीर‘ और ‘अग्निसाक्षी‘ के लिए।
भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनका बेबाक अंदाज और उनके शानदार रोल हमेशा हिंदी सिनेमा में याद रखे जाएंगे। उनकी ये फिल्में बताती हैं कि एक सच्चा कलाकार कभी लोगों के दिलों से दूर नहीं होता, बल्कि हमेशा उनके दिलों में जिंदा रहता है।
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