फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म का मुद्दा एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से गरमाया हुआ है। लगातार इसपर बहस छिड़ी हुई है। हालांकि बॉलीवुड भी इसे लेकर दो गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। नेपोटिज्म को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के ग्रुप का कहना है कि यहां पर नेपोटिज्म को बढ़ावा दिया जाता है जबकि दूसरे ग्रुप के लोगों का कहना है कि हिंदी सिनेमा के अलावा नेपोटिज्म हर क्षेत्र में है।

हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्ममेकर आर बाल्की ने हाल ही में एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में नेपोटिज्म के मुद्दे पर खुलकर उन्होंने अपनी बात रखी। आर बाल्की ने कहा, इसे नकारा नहीं जा सकता। ये हर जगह है और हर इंडस्ट्री में है। महिंद्रा, अंबानी और बजाज के बारे में सोचो क्या वो अपना किसी और को बिजनेस देंगे? क्या कोई ये कहेगा कि मुकेश अंबानी को अपना बिजनेस नहीं चलाना चाहिए बल्कि किसी और को दे देना चाहिए। समाज में ये हर जगह है। सब्जी वाला और ऑटो वाला भी अपना बिजनेस अपने बच्चों को ही देकर जाता है।

नेपोटिज्म का सपोर्ट नजर आया बाल्की की बातों में
आर बाल्की ने आगे कहा, अब इस बीच ये सवाल उठता है कि क्या स्टार किड्स के पास ज्यादा एडवांटेज होती है? हां, हर एक चीज के कुछ फायदे और कुछ नुकसान होते हैं। लेकिन मैं एक सिंपल सा सवाल पूछता हूं। मुझे आलिया और रणबीर से बेहतर एक्टर लाकर दे दो, फिर मैं इस पर बहस करूंगा। किसी भी अच्छे अभिनेता को लेकर इस तरह की बात करना कि वो सिर्फ स्टार किड होने की वजह से यहां है, सही नहीं है।

बाल्की ने अपने बयान में इस बात को कबूला फिल्म इंडस्ट्री में स्टार किड्स को आसानी से एंट्री मिल जाती है। आर बाल्की ने कहा, हमें ये बात समझने की जरूरत है कि ऑडियंस बुरे एक्टर्स को प्यार नहीं करती। कई बार वो स्टार किड्स को पर्दे पर देखना चाहतें हैं। लेकिन इसका फायदा उन्हें सिर्फ पहले चांस में मिलता है। इसके बाद उन्हें इंडस्ट्री में खुद संघर्ष करना पड़ता है। मैं मानता हूं कि बाहरवाले के लिए इंडस्ट्री में एंट्री करने में थोड़ी परेशानी होती है। लेकिन टैलेंट को मौका मिल ही जाता है।



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